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Uttar Pradesh News सूरतगंज की अफरोज बानो ने हाई स्कूल की परीक्षा में 91.16% अंक हासिल करे

रिपोर्टर मो ज़ैद सूरतगंज बाराबंकी उत्तर प्रदेश

बाराबंकी। कहावत है कुछ कर बैठने का जज्बा हो तो इंसान को कोई चीज़ आड़ नही बन सकती और मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। ये कहावत फूलपुर सूरतगंज की अफरोज बानो ने हाई स्कूल की परीक्षा में 91.16% अंक हासिल करके सही साबित कर दिखाया है। छात्रा की इस सफलता से शिक्षक, अभिभावक और रिश्तेदार सभी खुश है और बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। लेकिन, इस सफलता के पीछे की खानी सुनकर ना सिर्फ आप हैरान रह जाएंगे बल्कि आप कुछ सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।

बताते चलें कि सूरतगंज के फूलपुर निवासी नसीर के चार बेटियां हैं,सबसे बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है जबकि अफरोज बानो तीसरे नंबर पर है। पिता नसीर चौराहे पर मिठाई का ठेला लगाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। तीनों बेटियां भी अपने पिता के कामों में हाथ बटाती थी। दो सप्ताह पूर्व लंबी बीमारी व इलाज के आभाव में पिता नसीर की मौत हो गई। कोई भाई न होने के कारण घर चलाने की जिम्मेदारी इन्ही बेटियों के कंधों पर आ गई। अफरोज अपनी पढ़ाई भी करती और स्कूल से वापस आकर चौराहे पर मिठाई का ठेला लगाती जिससे घर का खर्च चलता। सरका के आत्मनिर्भर के सपने को साकार करती इस छात्रा की कहानी भी किसी बड़े जज्बे से कम नहीं है। बच्ची का यह जज्बा कहें या जंबूरी, बाहर हाल पिता के निधन के बाद अफरोज बानो ने घर बाप की जिम्मेदारी को अपने सर पर उठाने के साथ ही पढ़ाई भी जारी रखने का फैसला लिया। छात्रा ने मेहनत की जिसका नतीजा हुआ कि हाल ही में आए बोर्ड के रिजल्ट में अफरोज बानो को हाई स्कूल परीक्षा में 91.16%अंक हासिल हुए। छात्रा की इस सफलता से न सिर्फ शिक्षक,अभिभावक सहित रिश्तेदारों में भी खुशी का माहौल है बल्कि बच्ची की मेहनत की हर कोई सराहना कर रहे है। अफरोज बनो ने बताया कि उसकी ख्वाहिश है की अच्छे स्कूल में पढ़ाई करे लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उसका यह भी का कहना है कि पिता की बीमारी की वजह से मजबूरन मुझे ठेला लगाना पड़ा जिससे मेरी पढ़ाई पर बहुत फर्क पड़ा। मेरी ख्वाहिश थी की उत्तर प्रदेश में मेरिट सूची में आने की। अल्लाह ने चाहा तो इंटर में मैं ये मुकाम जरूर हासिल करूंगी।

सहयोग मिले तो हासिल हो सकता है बड़ा मुकाम

छात्रा अफरोज बनो के अंदर जो जज्बा है वो साबित करता है कि बच्ची किसी बड़े मुकाम तक पहुंचन सकती है लेकिन उसे वहां तक पहुंचने में किसी बड़े सहयोग की जरूरत है। अगर बच्ची को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग मिल जाए तो मेहनत करने में पीछे नहीं है और वह प्रदेश स्तर पर अपनी मेहनत का लोहा मनवाने को तैयार है।

मजबूरियां इंसान को कुछ भी करा सकती हैं
छात्रा अफरोज की कहानी भी किसी दास्तान से कम नहीं है। उसका कहना है कि उसे इस तरह चौराहे पर ठेला लगाना अच्छा बिल्कुल नहीं लगता है लेकिन मजबूरियां इंसान को कुछ भी करा सकती है, वह चाहती है कि आजाद होकर पढ़ाई करे, लेकिन काश कोई ऐसा होता जो उसका सहयोग कर सकता।

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