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रोड चौड़ीकरण की आड़ में ‘मिट्टी माफिया’ का खेल, चंबल की कोख उजाड़कर इटावा की कॉलोनियों में भरा जा रहा ‘काला सोना

रोड चौड़ीकरण की आड़ में ‘मिट्टी माफिया’ का खेल, चंबल की कोख उजाड़कर इटावा की कॉलोनियों में भरा जा रहा ‘काला सोना*’

उदी/बढपुरा

विकास की चमक के पीछे विनाश का काला कारोबार फल-फूल रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर इन दिनों माफियाओं ने मिट्टी के अवैध व्यापार का ऐसा जाल बुना है, जिससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।

मिट्टी का गोरख धंधा बड़े ही ऊंचे स्तर पर कालाबाजारी मिट्टी की चल रही है

*कैसे हो रहा है ‘काली कमाई’ का खेल?*

यमुना पुल से चंबल पुल तक होने वाले रोड चौड़ीकरण को माफियाओं ने कमाई का जरिया बना लिया है। कागजों पर तो यह मिट्टी सड़क निर्माण के लिए दिखाई जा रही है, लेकिन हकीकत में यह कि बढपुरा थाना क्षेत्र से गुजर कर, थाना इकदिल, थाना कोतवाली, थाना फ्रैंड्स कालौनी क्षेत्रों से गुजरकर मिट्टी इटावा शहर के थाना फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित ‘अड्डा भगवान’ और अन्य नई विकसित हो रही कॉलोनियों के प्लॉटों तक पहुंचाई जा रही है।

*सस्ते में खरीद, लाखों में सौदा*

मध्य प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित वरही और रानीपुरा गांव के किसानों की जमीन, जो चंबल नदी किनारे स्थित है, उसे चौड़ीकरण के नाम पर कौड़ियों के दाम खरीदा गया।

अवैध भराव: वही मिट्टी अब सैकड़ों डंपरों के जरिए दिन-रात इटावा की कॉलोनियों में ऊंचे दामों पर बेची जा रही है। एक-एक प्लॉट भरने के बदले माफिया लाखों रुपये वसूल रहे हैं।

*प्रशासन की आंखों में धूल या मिलीभगत?*

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। वैध परमिशन (Mining Permit) का हवाला देकर अवैध डंपरों का काफिला सरेआम सड़कों पर दौड़ रहा है।

*बड़ा सवाल–*
जब परमिशन रोड चौड़ीकरण के लिए है, तो ये डंपर निजी कॉलोनियों और प्लॉटों का सीना क्यों भर रहे हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी अपनी आंखें मूंदकर किसी बड़े इशारे का इंतजार कर रहे हैं?

*मीडिया की पड़ताल में उड़े होश*

जब मीडिया की टीम ने धरातल पर जाकर इस ‘मिट्टी के खेल’ की पड़ताल की, तो नजारा हैरान करने वाला था। दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक सैकड़ों डंपर फर्राटा भर रहे हैं। वरही और रानीपुरा की जमीन को छलनी किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि सरकार के राजस्व खाते में जाने वाला पैसा माफियाओं की जेब में जा रहा है। और चंबल के पहाड़ों की खूबसूरती पर भी दाग लग रहा है

*मुख्य बिंदु जो खोलेंगे शासन की आंखें*

1.*राजस्व की बड़ी चोरी* बिना रॉयल्टी चुकाए मिट्टी का कमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा है।
2. *कागजी जालसाजी* परमिशन रोड की, और सप्लाई प्लॉटों की।
4.थाना फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र का ‘अड्डा’ डंपरों का मुख्य गंतव्य स्थल जहां खुलेआम भराव चल रहा है।

*निष्कर्ष*
अगर समय रहते इस ‘मिट्टी माफिया’ पर लगाम नहीं कसी गई, तो चंबल के किनारे की भौगोलिक स्थिति तो बिगड़ेगी ही, साथ ही शासन-प्रशासन की साख पर भी गहरा दाग लगेगा। अब देखना यह है कि इटावा प्रशासन इन ‘मिट्टी के सौदागरों’ पर बुलडोजर चलाता है या इस आंखे खोलने वाली खबर को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

*नोट– मीडिया पड़ताल में मध्य प्रदेश के वरही, रानीपुरा गांव से भरकर थाना फ्रेंड्स कॉलोनी के अड्डा भगवान कॉलोनी इटावा प्लॉट पर मिट्टी डालता डंपर का फोटो👆👆👆👆👆👆👆*

 

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