
रिपोर्टर संजय मीणा किशोरपुरा झुंझुनू राजस्थान
आमेर जयपुर नगर सीमा मे ही स्थित उपनगर है ,इसे मीणा राजा आलन सिंह ने बसाया था,कम से कम ९६७ ईस्वीसे यह नगर मौजूद रहा है ,इसे १२३७ ईस्वी मे राजपूत जाति के कच्छावा कुल धोखे से जीत लिया था। आमेर नगरी और वहाँ के मंदिर जों मीणाओं द्वारा किला स्थापित करते दौरान बनाया गया था मां अंबिका मंदिर, आमेर में ही है चालीस खम्बों वाला वह शीश महल, जहाँ माचिस की तीली जलाने पर सारे महल में दीपावलियाँ आलोकित हो उठती है। हाथी की सवारी यहाँ के विशेष आकर्षण है, जो देशी सैलानियों से अधिक विदेशी पर्यटकों के लिए कौतूहल और आनंद का विषय है। अम्बे मां के मन्दिर के नाम पर यह नगर “आमेर” बना इसकी भीतरी दीवारों, गुम्बदों और छतों पर शीशे के टुकड़े इस प्रकार जड़े गए हैं कि केवल कुछ मोमबत्तियाँ जलाते ही शीशों का प्रतिबिम्ब पूरे कमरे को प्रकाश से जगमग कर देता
भक्ति और इतिहास के पावन संगम के रूप में स्थित आमेर नगरी अपने विशाल प्रासादों व उन पर की गई स्थापत्य कला की आकर्षक पच्चीकारी के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। पत्थर के मेहराबों की काट-छाँट देखते ही बनती है।आम्बेर का किला अपने शीश महल के कारण भी प्रसिद्ध है। इसकी भीतरी दीवारों, गुम्बदों और छतों पर शीशे के टुकड़े इस प्रकार जड़े गए हैं कि केवल कुछ मोमबत्तियाँ जलाते ही शीशों का प्रतिबिम्ब पूरे कमरे को प्रकाश से जगमग कर देता है। सुख महल व किले के बाहर झील बाग का स्थापत्य अपूर्व है।


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