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Rajasthan News किशन सहाय मीणा आईपीएस चम्बल व इसकी सहायक नदियों पर राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने में सभी एकजुट है

रिपोर्टर संजय मीणा किशोरपुरा झुंझुनू राजस्थान

चंबल व इसकी सहायक नदियों पर बन रही पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना यानी ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट(ERCP) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने के लिए सभी एकजुट है किशन सहाय मीणा आईपीएस चम्बल व इसकी सहायक नदियों पर राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने में सभी एकजुट है राजस्थान कैनाल(ERCP,ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने में सभी एकजुट हैं लेकिन वर्तमान ERCP तीनों चरणों में पूर्ण होगी और इसमें कालीसिन्ध नदी का खुद का पानी व पावर्ती नदी,कूल नदी और कूनो नदी का पानी लाने का ही प्रावधान है इसमें चम्बल, सीप आदि नदी का पानी शामिल नहीं है क्योंकि वर्तमान परियोजना में कालीसिन्ध नदी पर(चम्बल नदी में मिलने से पहले) कोटा जिले के नोनेरा में बांध बनाकर पानी को लिफ्ट करने का प्रावधान है।नोनेरा बांध कालीसिन्ध नदी पर बनाया जा रहा है।उस बांध से ऊपर कालीसिन्ध नदी में पार्वती नदी को डाला जाएगा तथा पार्वती नदी में कूल नदी को डाला जाएगा तथा कूल नदी में कूनू नदी को लिफ्ट करके डाला जाएगा।यानि वर्तमान प्लानिंग के मुताबिक ERCP में तीनों चरण (phase)पूर्ण होने पर भी चम्बल व सीप नदी का पानी इसमें नहीं मिलाया जाएगा। चम्बल नदी में सवाई माधोपुर के खण्डार के पास(रामेश्वर घाट पर)एक महत्वपूर्ण नदी सीप मध्यप्रदेश की तरफ से आकर मिलती है उसका पानी भी ERCP को नहीं मिलेगा। ERCP को सुव्यवस्थित करने का तरीका यह है कि वर्तमान में बन रहे नोनेरा बांध से पानी लिफ्ट करने के अलावा सवाई माधोपुर के झरेल के बालाजी या रामेश्वर घाट से एक लिफ्ट नहर बनाई जाए जो सवाई माधोपुर जिले की खण्डार तहसील,सवाई माधोपुर तहसील, बौंली तहसील,बरनाला तहसील,दौसा जिले की लालसोट,रामगढ़ पचवारा क्षेत्र,दौसा तहसील,टोंक की निवाई तहसील व दत्तवास क्षेत्र के बांधों के पानी की आपूर्ति करे। चम्बल नदी पर एक लिफ्ट नहर करौली जिले के मण्डरायल से बनानी चाहिए जिसका पानी पांचना बांध में लाया जाए पांचना बांध से करौली जिले की तहसीलों जैसे करौली, हिंडौन,टोडाभीम, नादौती के बांधों,सवाई माधोपुर जिले की बामनवास तहसील व गंगापुर तहसील व भरतपुर जिले की नदबई तहसील, भुसावर तहसील, वैर तहसील,बयाना तहसील, रूपवास तहसील, उच्चैन तहसील,भरतपुर तहसील आदि के बांधों को तथा दौसा जिले की सिकराय तहसील, महुआ तहसील, मंडावर तहसील, बांदीकुई तहसील, अलवर जिले की रैणी तहसील, राजगढ़ तहसील, लक्ष्मण गढ़, कठूमर तहसील, रामगढ़ तहसील आदि के बाँधों को जोड़ा जाना चाहिए।
भरतपुर जिले की डीग,कामां,पहाड़ी, नगर,कुम्हेर आदि तहसीलों के बांधों को यमुना लिफ्ट केनाल से जोड़ा जाना चाहिए।
धौलपुर के पास लिफ्ट नहर बनाकर राजाखेड़ा तहसील को पानी देने की लिफ्ट नहर पर शायद काम चालू है।धौलपुर के पास से और पानी लिफ्ट करके सरमथुरा तहसील,बाड़ी तहसील, सैंपऊ तहसील,मनिया तहसील,धौलपुर तहसील के बांधों को पानी दिया जाना चाहिए। अलवर जिले की बहरोड़,बानसूर, तिजारा, खैरथल,किशनगढ़ बास, कोटकासिम तहसीलों तथा जयपुर जिले की कोटपूतली, शाहपुरा तहसीलों के बांधों को यमुना लिफ्ट नहर बनाकर जोड़ा जाना चाहिए।
वर्तमान में नोनेरा बांध से बून्दी जिले की नेनवा तहसील,टोंक जिले की मालपुरा तहसील,पीपलू तहसील,टोडा रायसिंह तहसील,टोंक तहसील तथा जयपुर जिले की बस्सी, जमवारामगढ़, फागी, दूदू, बगरू,सांभर, चौमू,अलवर जिले की थानागाजी,अलवर तहसील तथा अजमेर जिले की केकड़ी, सावर, सरवाड़, भिनाय, नसीराबाद, अराईं, किशनगढ़, रूपनगढ़, ब्यावर, मसूदा, विजयनगर, अजमेर, पीसांगन आदि तहसीलों के बांधों को जोड़ा जाना चाहिए। कुल मिलाकर ERCP में सिर्फ एक ही स्थान नोनेरा(जिला कोटा)से पानी लिफ्ट करने के बजाय चम्बल नदी पर से तीन-चार अन्य स्थानों से पानी को लिफ्ट करना चाहिए यानि परियोजना में पानी के लिफ्ट करने के स्थानों का विकेंद्रीकरण करना चाहिए इससे प्रोजेक्ट की कीमत भी वर्तमान से काफी कम हो जाएगी तथा इस परियोजना को दुगुने के करीब पानी मिलेगा तथा उपरोक्त सुझाए गए कई स्थानों लिफ्ट नहरों का साथ कार्य किया जा सकेगा यानि परियोजना में समय भी काफी कम लगेगा। जब सिन्धु व उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर हम पाकिस्तान से समझौता कर सकते हैं तो मध्यप्रदेश व राजस्थान में कोई फर्क नहीं है, दोनों पड़ौसी राज्य हैं इनके बीच में ERCP को लेकर समझौता हो ही जाएगा तथा केन्द्र भी अपना सहयोग करेगा,ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है क्योंकि हर प्रधानमंत्री चाहेगा कि देश के विभिन्न भागों खुशहाली बढ़े वे प्रगति करें।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी किसान वर्ग से है इसलिए वहाँ की सरकार भी यही चाहेगी कि फिजूल बहकर जाने वाले पानी का पीने/सिंचाई के लिए सदुपयोग हो।देश के किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री किसी भी पड़ौसी राज्य या दूसरे राज्य की प्रगति में बाधक बनना नहीं चाहेगा बल्कि साधक बनना चाहेगा। यह लेख अनुमान,अनुभव,चर्चा, जनकल्याण व सद्भावनाना के आधार पर लिखा है तथा नहरी विभाग के इंजीनियर जो कि एक्सपर्ट होते हैं उनकी राय ज्यादा मायने रखेगी।

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