
✍️ रिपोर्टर डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव कांकेर छत्तीसगढ़
भानुप्रतापदेव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कांकेर में एरूडाइट व्याख्यान माला में छटवें दिन सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग एवं मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.विमल कानूनगो, रायपुर प्राध्यापक वनस्पति विज्ञान एवं डॉ. अविनाश शर्मा प्राध्यापक अभनपुर उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ.व्ही.के.रामटेके ने की। कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती मॉ के छाया-चित्र का पूजन अर्चन कर किया गया। बी.ए. भाग तीन के विद्यार्थी त्रिलोचन निषाद ने बॉसुरी वादन के माध्यम से स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों को महाविद्यालय परिवार द्वारा स्वागत में पुष्प का पौधा भेंट किया गया। डॉ. अर्चना सिंह संयोजक आई.क्यू.ए.सी. द्वारा स्वागत भाषण में कहा गया कि ‘‘ज्ञान प्राप्त करना बुद्धिमता है तथा ज्ञान बॉटना इंसानियत। अतिथि परिचय क्रमशः डॉ. अर्चना सिंह एवं प्रो. अलका केरकेट्टा विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा ‘‘सृजन के इस मौसम में यह व्याख्यानमाला किसी त्यौहार से कम नही है।
आज के प्रथम सत्र में डॉ. विमल कानूनगो द्वारा ‘एप्लीकेशन ऑफ माइक्रोबॉयलॉजी’ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। लुईस पास्चर को ‘फादर ऑफ माइक्रोबायलॉजी’ की उपाधि देते हुए डॉ. विमल कानूनगो ने सुप्रसिद्ध सूक्ष्म जीव वैज्ञानिक का उदाहरण देते हुए बच्चों को प्रेरित किया कि जब सुविधाऐं नहीं थी तब भी बड़े-बड़े कार्य किए गए तो अब तो आप सभी के पास अपार संभवनाएं है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म जीव विज्ञान मानव जीवन के लिए बहु उपयोगी है। ये सूक्ष्म जीव न केवल शरीर तंत्र के लिए सहायक है बल्कि येे खाना बनाने से लेकर खाना पचाने तक में हमारी सहायता करते है। धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में, खदानों से शुद्ध धातु प्राप्त करने में समुद्र से ईधन प्राप्त करने में और अंतरिक्ष यात्रा में भी फ्लोरिला नामक एलगी के माध्यम से श्वसन प्रक्रिया में ये सहायक होते है। डॉ. कानूनगों ने सूक्ष्म जीव विज्ञान को आगे आने वाले वर्षाे में कम्प्यूटर के पार्ट्स एवं चिप्स बनाने, स्वास्थ्य के क्षेत्र में एंटीबॉयोटिक बनाने, कपड़ा उत्पादन, सल्फर चक्र को व्यवस्थित करने एवं सौदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में उपयोगी बताया।
द्वितीय सत्र में ‘‘व्यक्तित्व विकास एवं तनाव प्रबंधन’’ विषय पर डॉ. अविनाश शर्मा प्राध्यापक अभनपुर ने बड़े ही रोचक, मनोरंजक एवं प्रेरणास्पद रूप से व्याख्यान दिया। उन्होंने व्यक्तित्व के कई प्रकारों एवं उसके निर्धारक तत्वों की भी चर्चा की। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे. अब्दुलकलाम, सुप्रसिद्ध उद्योगपति धीरूभाई अंबानी, बल्ब के आविष्कारक थॉमस एडिसन, इस सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संघर्षाे से सीख लेते हुए अपने व्यक्तित्व विकास के लिए उन्होंने महापुरूषों के बताए गए मार्गाे को चरण बद्ध तरीके से अपनाने की बात कही। तनाव को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए ‘कॉडिसॉल’ नामक हार्माेन्स से इसकी उत्पति बताई तथा जीवन को तनाव मुक्त बनाने के लिए विभिन्न उपाय बताए। इस हेतु उन्होंने विद्यार्थियों से अग्रह किया कि अपने शौक पूर्ण करे, दूसरों की निःस्वार्थ सहायता करें एवं व्यवस्थित दिनचर्या का पालन करें। उन्होंने परीक्षार्थियों के परीक्षा के भय को कम करने के लिए विभिन्न मनोरंजक कार्टून दिखाए एवं प्रेरणास्पद कथन भी बताए। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों को समृति चिन्ह तथा महाविद्यालयीन पत्रिका ‘‘उपत्यका’’ भेट की गई। आभार प्रदर्शन प्रो. शरद ठाकुर एवं नेलसन खेस द्वारा किया गया एवं मंच संचालन प्रो. विजय प्रकाश साहू द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय परिवार का सक्रिय योगदान रहा।




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