
रिपोर्टर अंसारी रफीक नूरी अहमदाबाद गुजरात
सुन्नी दावत ए इस्लामी के निगरान (अजमेर शरीफ) मौलाना मोईनुद्दीन रजवी ने रमज़ान मुकद्दस महिने के आगाज को देखते हुए अकीदतमंदो को माहे रमज़ान की फजीलत और उस की कद्र करने के बारे मे जानकारी दी उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्की हर तरह की बुराई से बचने और आगे की जिंदगी में भी गुनाहों से बचने का नाम है ।मौलाना रजवी ने बताया कि रमज़ान का महीना बरकातों और रहमतों का महीना है एक हदीस हैं कि जो रमज़ान के पूरे रोजे रखे और उस कि नियत यह भी हों कि रमज़ान के बाद गुनाहों से बचता रहा हूं उंगा तो वो बैगर हिसाब व किताब और बैगर सवलो जवाब जन्नत में दाखिल होगा। रोजेदारों के लिए जन्नत में जानें के लिए अल्लाह ने स्पेशल दरवाज़ा रय्यान बनाया है। इस में सिर्फ रोजेदार ही दाखिल होंगे । इन के सिवा और कोई इस दरवाज़े से दाखिल नहीं होगा । जो शख़्स अल्लाह की राह में एक दिन का रोजा रखेगा अल्लाह तआला जहन्नुम की आग से उस के चेहरे को सत्तर साल की मसाफत तक दूर रखेगा। रसूले खुदा ने फरमाया रोजा रखो सेहतमंद हो जाओगे। पता चला रोजा रखने से कमजोरी नहीं आती बल्की आदमी सेहतमंद हो जाता है।
चार किस्म के आदमियों का जन्नत इंतजार करती हैं।
1-रमज़ान के रोजे रखने वाले का।
2-क़ुरआन की तिलावत करने वाले का।
3-जबान की हिफाजत करने वाले का।
4-भूखे पड़ोसियों को खाना खिलाने वाले का।
हलाल कमाई से करवाएं इफ्तार व सेहरी
मौलाना रजवी ने बताया कि यह याद रहें रोजा इफ्तार व सेहरी हलाल कमाई से करवाने पर ही सवाब मिलेगा। हराम के पैसों से जैसे ब्याज की कमाई लोगों को धोका दे कर कमाई शराब के कारोबार की कमाई जुए कि कमाई मिलावट का सामान बेच कर कमाना वगेरह इन सब से की कमाई से अगर इफ्तार व सेहरी कराई तो बहूत बड़ा गुनाहगार है और उसने लोगों के रोजो को बरबाद किया। रोजे का मकसद भूखा रहना नहीं है रोजा रखने के बाद आदमी को झूठ गिबत चुगली गाली ग्लोच किसी को सताना कानों की हिफाजत वगेरह इन सब से बचना चाहिए इस का नाम रोजा है। इफ्तार के वक्त अल्लाह से जो जायज दुआएं मांगी जाती हैं अल्लाह उस को जरुर कबूल फरमाता है

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