
रिपोर्टर दीपक कुमार मुज़फ़्फ़रपुर बिहार ।
होली महापर्व सात्विकता पवित्रता अच्छाई का महापर्व है जिसमें सत्य की जीत और पाप पापियों का नाश का उदाहरण मेे मनाए जाने वाला है यह महापर्व देवताओं एवम् असुर मेे वर्चस्व की लड़ाई में जीत देवताओं कि हुए थे और देवताओं का जीत मेे ही उनकी भक्ति में यह महापर्व मनाए जाते है । भक्ति भाव श्रद्धा आस्था पवित्रा से होता है ,इसमें कोई भी हंगामा या विवाद या नशा पान से देवता नराज हो जाते है , धन की देवी लक्छमी और श्री विष्णु नशा पान एवम् विवाद से नराज़ हो जाते है । कुबेर जी महाराज को विवाद और नशा पान कतई पसंद नहीं है ।
मुज़फ़्फ़रपुर । शिव अंश सिद्धि प्राप्त कथावाचक श्री महाकाल जी आंनद दीपक जी महाराज के अनुसार : होली महापर्व इस वर्ष भद्रा काल होने से यह आज है देर रात्री बारह बजे के बाद से कल सूर्योदय से पूर्व होलिका दहन किया जा सकता है ,इसमें होली का महापर्व पृथ्वीलोक पर अधिकांश खंड में जैसे बिहार समेत कई राज्य में आज ही है दहन बारह बजे बाद होगा और होली महापर्व को बुधवार को आठ मार्च को मनाए जायेगे , वहीं उजैन महाकाल मंदिर समेत कई मन्दिर मेे काल खंड या किसी सूतक पातक या भद्रा किसी दोष का प्रभाव नहीं होता है ,वहा विधिवत होलिका दहन और होली महापर्व श्री महाकाल की पूजा अर्चना अभिषेक आरती और होलिका दहन कर मनाए जायेगे , श्री महाकाल काल के स्वामी है । उजैन्न पुष्प से खेली गई होली के लिए प्रसिद्ध है । दूर दूर से इस होली में भाग लेने महाकाल की नगरी में श्रद्धालु आते है । वहीं बिहार समेत सभी जिला में आज ही रात्रि मेे होलिका दहन का संयोग बनता है , होली महापर्व कुछ लोग सात को और कुछ लोग आठ को मनाएंगे ,मगर आठ मार्च को ही होली का महापर्व का बेहतर दिन है , होली में इस बार कई राशियों का संयोग बदल जाएगा क्योंकि इस माह में बेहतर नछतर और बेहतर कर्म फल प्राप्त का अवसर प्राप्त होंगे ,कुछ राशि वाले के लिए आने वाला कुछ दिन बेहतर नहीं होगा ,कुछ के लिए शुभ ही शुभ है ,कुछ की पद ,नौक री समेत सत्ता पर भी पड़ेगा ,क्योंकि हाल में हुए सूर्य ग्रहण एवम् चंद्र ग्रहण का प्रभाव अभी ख़तम नहीं हुआ है ,
वहीं पृथ्वीलोक पर प्राकृतिक आपदा का प्रभाव रहेगा ,महामारी का स्वरूप रहेगा ,कई खंड मेे उथल पुथल रहेगा ,यह संयोग आगे हिंदी धार्मिक महीना चैत के आरम्भ से होगा ,सावधानी के साथ नियम विधि का पालन करते रहते हुए भक्ति भाव एवम् अनुष्ठान यज्ञ महायज्ञ से कल्याण होगा ,अनावश्यक विवाद से बचना होगा ,इस वर्ष का होली भी सत्य धर्म और आस्था को संजोए हुए आएगा । होली काफी महत्वपूर्ण और संवेदनशील महापर्व है जो वास्तविकता को प्रदर्शित करता है । असुर और सुर यानी देवता और दानव के वर्चस्व मेे देवताओं का विजय हुआ था ,यानी बुराई पर अच्छाई का विजय हुआ था ,जिससे यह महापर्व मनाए जाते है ,होलिका दहन भी इसी का प्रमाण है और यह महापर्व भी इसी सत्यता का प्रमाण है । खुद के भविष्य के लिए कल्याणकारी कार्य ही बेहतर भविष्य प्रदान करेगे ,अन्यथा होली महापर्व का उदाहरण है वह सभी जानते है । होली में कोई पाप कर्म ना करे ,नशा तो सेवन करे ही नहीं ,अन्यथा विनाश होना तय है ,किसी से विवाद ना करे ,ना किसी को विवाद में उलझाए ,अन्यथा काल चक्र प्रभावी होगा ,जिवन दुखदाई होगा ,अच्छाई और सच्चाई से होली मनाए तभी कल्याण होगा । होली का वास्तविक अर्थ समझना होगा । काफी शुभ मुहूर्त में होलिका दहन एवम होली महापर्व आया है ,यह संयोग लंबे समय बाद आया है । भूल कर भी नहीं करे नशा पान और मांस भक्छन या नहीं करे कोई विवाद अन्यथा काल चक्र का होगा प्रभाव ,जीव हिंसा देवताओं को पसंद नहीं है ।
होली महापर्व सात्विकता पवित्रता अच्छाई का महापर्व है जिसमें सत्य की जीत और पाप पापियों का नाश का उदाहरण मेे मनाए जाने वाला है यह महापर्व , देवताओं एवम् असुर मेे वर्चस्व की लड़ाई में जीत देवताओं कि हुए थे और देवताओं का जीत मेे ही उनकी भक्ति में यह महापर्व मनाए जाते है । भक्ति भाव श्रद्धा आस्था पवित्रा से होता है ,इसमें कोई भी हंगामा या विवाद या नशा पान से देवता नराज हो जाते है , धन की देवी लक्छमी और श्री विष्णु नशा पान एवम् विवाद से नराज़ हो जाते है । कुबेर की महाराज को विवाद और नशा पान कतई पसंद नहीं है ।


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