इन दिनों सिहावा क्षेत्र के गणेश घाट और साकरा केनाल में करोड़ों रुपये की लागत से नहर मरम्मत कार्य तेजी से जारी है। निर्माण कार्य स्थल पर बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण देखा जा रहा है, जिसने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि कार्यस्थल पर जितनी मात्रा में रेत डम्प की गई है, उसकी आपूर्ति और परिवहन को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह रेत कहां से लाई जा रही है और क्या इसके लिए वैध रायल्टी (अनुमति) ली गई है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए—रेत के स्रोत, परिवहन और रायल्टी दस्तावेजों की पड़ताल की जाए—तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि रेत अवैध तो नहीं
इस मामले में जांच होने से न सिर्फ पारदर्शिता सामने आएगी, बल्कि शासन को होने वाले राजस्व की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी संभव है।
रायल्टी और अनुमति की जांच की मांग तेज
जांच से खुल सकती है वैध-अवैध परिवहन की परत
विकास कार्यों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा इस मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है, ताकि जनहित और शासन के राजस्व दोनों की सुरक्षा हो सके।