उत्तरप्रदेशराजनीतिराज्य

Uttar Pradesh News लोकसभा सीट हरदोई समीकरण : बीजेपी का दबदबा ही कायम रहने की उम्मीद

रिपोर्टर अजीत अग्निहोत्री हरदोई उत्तर प्रदेश

हरदोई  आजादी के बाद सही हरदोई संसदीय सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट रही है | और 2019 से पहले 16 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं | राजधानी लखनऊ से सटे होने के नाते हैं मानी जाती रही है | यह संसदीय क्षेत्र नरेश अग्रवाल के नाम से ज्यादा चर्चा में रहती है क्योंकि जिले में उनके नाम का ही राजनीतिक दबदबा कायम रहा है | 2019 में ग्यारह उम्मीदबार मैदान में थे | मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के जयप्रकाश, सपा की उषा वर्मा और कांग्रेस के वीरेंद्र कुमार के बीच रहा था | बीजेपी के जयप्रकाश से सांसद बने थे | अब देखना होगा कि 2024 में बीजेपी जीत का सिलसिला कायम रखती है या विपक्ष की ओर से कोई सेंधमारी लगा पाएगा | हरदोई लोकसभा सीट पर 1957 में कांग्रेस के छेदा लाल, 1962 1967 व 1978 में कांग्रेस के किंडर लाल सांसद बने | 1977 में लोक दल के परमाई लाल निर्वाचित हुए | 1980 में कांग्रेस आई के मन्नीलाल चुनाव जीतकर सांसद बने | 1984 में एक बार फिर से कांग्रेस के किन्दरलाल चुनाव जीत गए | 1989 में जनता दल के परमाईलाल, 1991 भाजपा से चुनाव लड़े जाति का सांसद बने | 1996 में जयप्रकाश ने एक बार फिर से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता | 1998 में सपा की उषा वर्मा सांसद बनी, 1999 में जब प्रकाश ने लोकतांत्रिक कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता | 2004 में 2009 में सपा की उषा वर्मा ने लगातार दो चुनाव जीते | 2014 में भाजपा के अंशुल वर्मा चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंचे | 2019 में जयप्रकाश ने एक बार फिर से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा का सफर तय करने में सफलता पाई | वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हरदोई लोकसभा की पांचों विधानसभाओं गोपामऊ, हरदोई, शाहाबाद, सांडी व सवाजपुर में भाजपा के विधायक बने | विधानसभा चुनाव में सपा दूसरे नंबर पर रही |

सीट का जाति समीकरण इस प्रकार है

अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट होने के नाते इस लोकसभा सीट में जीत का दारोमदार अगड़ी व पिछड़ी जातियों पर रहता है | राजनीतिक दल अमूमन पासी बिरादरी के प्रत्याशी को चुनाव में उतार कर बढ़त बनाते आये है | क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य मतदाताओं के साथ ही पिछड़ी जातियों में से कुर्मी, गडरिया, काछी, कहांर व यादव को छोड़कर अन्य पिछड़ी जातियों का गठजोड़ जीत हार तय कर देता है | मौजूदा राजनैतिक परिदृश्य में जयप्रकाश आज भी अपनी मजबूत स्थिति में नजर आते हैं, उन को टक्कर देने के मामले में उषा वर्मा ही सामने नजर आ सकती हैं | अब देखना यह होगा कि राजनीतिक पार्टियां किस उम्मीदवार को अपना प्रत्याशी घोषित करती हैं, उसी के आधार पर परिणाम आने की संभावना रहेगी |

Indian Crime News

Related Articles

Back to top button