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Uttar Pradesh News न्याय की कीमत 35 हजार!” जैतीपुर थाने में रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, एंटी करप्शन टीम ने आरक्षी को रंगे हाथ दबोचा

ब्यूरो चीफ अनुभव शाक्य शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश

शाहजहाँपुर: जनता को न्याय दिलाने का दावा करने वाली पुलिस खुद जब न्याय का सौदा करने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़िमी है। ऐसा ही एक मामला शाहजहाँपुर के जैतीपुर थाने से सामने आया है, जहां एंटी करप्शन टीम ने एक आरक्षी को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार के खेल का पर्दाफाश कर दिया। जानकारी के अनुसार, जैतीपुर थाने में तैनात आरक्षी विवेक कुमार पर आरोप है कि उसने एक मामले की विवेचना के निस्तारण के नाम पर शिकायतकर्ता सुधांशु कुमार शर्मा से 35 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद बरेली की एंटी करप्शन टीम ने पूरे मामले की गोपनीय जांच की और आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई।गुरुवार को निरीक्षक प्रवीण सान्याल के नेतृत्व में एंटी करप्शन टीम ने जैतीपुर थाने के आसपास जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी आरक्षी ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। कार्रवाई इतनी सटीक थी कि आरोपी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

क्या थाने में चल रहा था ‘रेट तय कर न्याय’ का खेल? इस गिरफ्तारी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विवेचना प्रभावित करने और मामलों के निस्तारण के लिए पैसों का खेल चल रहा था? क्या यह सिर्फ एक आरक्षी की करतूत है या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हैं? आम जनता के बीच अब यही चर्चा है कि अगर पुलिसकर्मी ही जांच को रुपये के तराजू पर तौलने लगें, तो निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कैसे की जाए। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश माना जा रहा है। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले की विवेचना निरीक्षक काशीनाथ उपाध्याय को सौंपी गई है। जनता पूछ रही है सवाल जैतीपुर थाने में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है कि कुछ भ्रष्ट कर्मचारी पूरे विभाग की छवि धूमिल कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कितने ऐसे मामले हैं जो रिश्वत की भेंट चढ़ जाते हैं और कितने पीड़ित न्याय के लिए मजबूर होकर अपनी जेब ढीली करने को विवश होते हैं? फिलहाल, 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए हुई यह गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई तो है, लेकिन साथ ही पुलिस व्यवस्था के भीतर छिपी गंभीर खामियों की ओर भी इशारा करती है।

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