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Jharkhand News 163 दिन, 13 राज्य और 11000 किमी का सफर तय कर बंगाल पहुंची आशा, महिला सशक्तिकरण का दिया संदेश

रिपोर्टर मिथिलेश पांडेय धनबाद झारखंड

‘जदि केऊ डाक सुने ना आसे तबे एकला चलो ले रे.’ यानी अगर कोई आपकी आवाज सुनकर नहीं आए तो अकेले ही चल पड़िए। महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस की इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है, मध्यप्रदेश की बेटी आशा मालवीय ने। वह पिछले 163 दिनों से अकेले चल रही हैं। अब तक वह 12 राज्यों का 11650 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं। सोलो साइकिल यात्रा पर पश्चिम बंगाल उनका 13वां राज्य है। एक ही सपना है, एक ही जिद है और एक ही संदेश देना चाहती हैं, महिलाओं का सशक्तिकरण और महिलाओं की सुरक्षा। बंगाल की राजधानी कोलकाता में अमर उजाला से खास बातचीत में कहा, भारत की बेटियों को डरने की जरूरत नहीं है। हमारा देश सुरक्षित है। बस, हिम्मत करने की जरूत है।

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