Bhopalशिक्षा

उच्च शिक्षा विभाग का फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश

उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के संबंध में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 से 8 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, विद्यार्थियों की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना तथा आत्महत्या की रोकथाम के लिए सहयोगात्मक एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण विकसित करना है। स्वस्थ मन, सशक्त शिक्षण और सुरक्षित भविष्य” के उद्देश्य के साथ यह पहल उच्च शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक एवं संवेदनशील वातावरण निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या रोकथाम, मनोवैज्ञानिक सहयोग, जीवन कौशल एवं संस्थागत जिम्मेदारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र में एम्स भोपाल के सहायक प्राध्यापक एवं मनोचिकित्सक डॉ. तन्मय जोशी ने “सुसाइड प्रिवेंशन : इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क फॉर हायर एजुकेशन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि आत्महत्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं संस्थागत उत्तरदायित्व से जुड़ा विषय है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में तनाव, अवसाद, सामाजिक अलगाव, व्यवहार परिवर्तन एवं अन्य चेतावनी संकेतों की समय रहते पहचान करने तथा सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। द्वितीय तकनीकी सत्र में शासकीय एम.एल.बी. कन्या महाविद्यालय भोपाल की प्राध्यापक डॉ. अनीता पुरी सिंह ने विद्यार्थियों में मानसिक संवेदनशीलता के संकेतों एवं “साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल अध्यापन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की भावनात्मक स्थिति को समझना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित सहयोग एवं परामर्श से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है। तृतीय तकनीकी सत्र में डॉ. अमित सोनी ने “मेंटल हेल्थ एंड राइट्स बेस्ड प्रिंसिपल्स एवं स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपी)” विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संकट, अत्यधिक तनाव, रैगिंग, यौन उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों में संस्थानों द्वारा संवेदनशील, त्वरित एवं गोपनीय प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। चतुर्थ तकनीकी सत्र में बी.एस.एस.एस. महाविद्यालय भोपाल के मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. विनय मिश्रा ने विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक कल्याण, जीवन कौशल एवं सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण पर विचार रखे। उन्होंने आत्म-जागरूकता, तनाव प्रबंधन, संवाद क्षमता, सहानुभूति एवं निर्णय क्षमता जैसे जीवन कौशल को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों के फैकल्टी सदस्यों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। आगामी दो दिनों में निजी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के शिक्षकों तथा कर्मचारियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

ChatGPT Image Jun 19, 2026, 03_57_34 PM

Related Articles

Back to top button