
रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश
अन्तर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर रष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए कहा। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश ने बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं। राष्ट्रपति मुर्मु शुक्रवार को खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। राष्ट्रपति मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया। मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जाँच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिये जा चुके हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया है । केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया, इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किये गये वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किया हैं। अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, जेनेटिक साइंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को एकसाथ जोड़कर यह राष्ट्र व्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान में राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है। सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किये जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक भी पहचाने जा चुके हैं। वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अनजाने ही अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं। संतोष की बात है कि पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियों और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्यप्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जाँच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया गया है। गत वर्ष 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” अंतर्गत मध्यप्रदेश ने 4 लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित करके इस समस्या के समाधान हेतु अमूल्य योगदान दिया है। मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा रही है। जनजातीय विद्यार्थियों को भी परामर्श, उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। दूरस्थ एवं दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से निरंतर स्क्रीनिंग की जा रही है। कहा कि पिछले वर्ष विश्व सिकल सेल दिवस पर प्रदेश में “सिकल मित्र” पहल का शुभारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने, रोगियों को सहायता प्रदान करने तथा उन्हें शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया गया है। इन सार्थक पहलों के लिए मैं प्रदेश के सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को बधाई देती हूं। मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे। देश में जनजातीय समुदाय की सबसे बड़ी संख्या मध्यप्रदेश में है। मैं आशा करती हूं कि मध्यप्रदेश द्वारा जनजातीय विकास के अनेक क्रीर्तिमान स्थापित किए जाएंगे।




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