भारतीय राजस्व सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्य प्रदेश
भारतीय राजस्व सेवा (आईटी) के 79 वें बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्यक्ष कर राष्ट्रीय विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजस्व का एक स्थिर स्रोत प्रदान करके, वे सरकारों को बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश करने में सक्षम बनाते हैं। एक निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली समानता को बढ़ावा देती है और समावेशी एवं विकास की नींव को मजबूत करती है। राष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राजस्व सेवा का दायित्व केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि आईआरएस अधिकारियों की जटिल वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण करने, सीमा पार अवैध वित्तीय प्रवाह का पता लगाने और जटिल कॉर्पोरेट संरचनाओं को सुलझाने की क्षमता उन्हें विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में राष्ट्र की प्रगति में अपरिहार्य भागीदार बनाती है। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायसंगत, कुशल और व्यावसायिक प्रक्रियाओं की गहन समझ पर आधारित निर्णय लें। राष्ट्रपति ने कहा कि आईआरएस अधिकारी होने के नाते, युवा अधिकारियों को अपने आचरण और निर्णय लेने में विवेक का प्रयोग करना चाहिए। एक विवेकशील अधिकारी प्रवर्तन और सुविधा प्रदान करने, अधिकार और विनम्रता, तथा तकनीकी क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखता है। उन्होंने उन्हें विनम्रता, संयम और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ अधिकार का प्रयोग करने की सलाह दी। भारतीय राजस्व सेवा (आईटी) के अधिकारी प्रशिक्षु, जिनमें रॉयल भूटान सेवा के दो अधिकारी प्रशिक्षु भी शामिल हैं, नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (एनएडीटी) में प्रेरण प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।




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