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Rajasthan News वन्यजीवो की रक्षा मे अपने बचपन को समर्पित कर रखा है मोहित शर्मा एवं दिव्या शर्मा।

रिपोर्टर संजय जोशी कोटपुतली राजस्थान

कोटपुतली  कहते है कि सेवा करने कि न तो कोई उम्र होती है । और न ही कोई समय परमात्मा ने मनुष्य को पृथ्वी पर अच्छा कार्य करने के लिए भेजा है। अपने लिए तो हर कोई जीवन जीता है लेकिन जो बेजुबान पशु पक्षियो की जान बचाने के लिए जीता है ।उसे जीवन कहते है हम विश्व वन्य जीव दिवस के मौके पर मौके पर राजस्थान के जयपुर जिले की पावटा तहसील के गांव भांकरी निवासी जीव प्रेमी मोहित शर्मा एवं दिव्या शर्मा की बात करते है। जिनका एक ही लक्ष्य है जहाँ भी कोई पशु पक्षी घायल या बीमार हो तुरन्त उसके पास पहुंचकर उसकी पीड़ा को दूर करवाती है। इतना नही पशु पक्षियो को भी इन दोनो भाई बहन के प्रति इतना ही लगाव हो गया कहते है कि मनुष्य किया हुआ उपकार भूल जाता है परन्तु पशुपक्षी किया हुआ उपकार कभी नही भूलते ऐसा ही वाकया 10 अक्टूबर 2019 को भांकरी मे हुआ था मोहित एवं दिव्या ने श्वानो के चंगुल से छुड़ाकर एक मोर को बचाया था वो मोर रोजाना सुबह इनके हाथो मे निर्डर होकर दाना चुगता है ये ही नही जब तक दोनो के पास दाना नही खाता तब तक वह जाता भी नही । कोरोना काल मे जहाँ लोग घरो मे छिपे बैठे हुए थे परन्तु मोहित शर्मा एवं दिव्या शर्मा ने दिन रात घायल पशु पक्षियो की रक्षा करने मे लगी हुई थी। गायो मे फैले भयानक लम्पी स्कीन रोग मे दिन रात इन दोनो भाई बहन ने गायो का उपचार करवाया एवं अपने हाथो से गायो के घावो पर रोजाना मरहम लगाना एवं जहाँ अधिक संख्या मे गायो का समूह बैठता था वहाँ रोगाणुनाशन दवा का छिडकाव करना इन्होने लम्पी के दौरान 500 से अधिक गायो का उपचार करवाया । मोहित शर्मा एवं दिव्या शर्मा से पशु पक्षी इतने घुल मिल गये है कि जैसे उनके घर के सदस्य है । जिन दूध पीते वन्यजीवो बच्चो की मॉ उन्हे जंगल मे छोड़कर चली जाती है या मर जाती उन्हे ये अपने हाथ से निप्पल एवं बोतल से दूध पिलाते है । इसके अलावा बिल्ली को दूध पिलाती है कुत्ते गाय आदि को खाना खिलाती है। इसके अलावा जो पशु चारा नही खा पाता है उन्हे अपने हाथो से खाना खिलाती है। इन्होने अब तक हजारो वन्य जीवो की जान बचाई है।

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