
रिपोर्टर बलदेव कक्कड़ मनसा पंजाब
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बीर होड़ला कलां में पंजाबी मातृभाषा को समर्पित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता, आलोचक व कथाकार निरंजन बोहा ने कहा कि हमारी मातृभाषा पंजाब विश्व की विकसित, वैज्ञानिक और सिद्ध भाषा है। उन्होंने कहा कि जिस भाषा को बाबा नानक, शेख फरीद, सुल्तान बहू, बुल्लेशाह और वर्षाशाह जैसे युग के महापुरुषों का समर्थन प्राप्त है, उसका उत्तराधिकारी होना हम सभी के लिए गर्व की बात है। स्कूल प्रभारी सुखदेव सिंह धालीवाल ने कहा कि दूसरी भाषा सीखना अच्छी बात है लेकिन अपनी मातृभाषा को भूल जाना समझदारी की निशानी नहीं है. हम अपनी मातृभाषा में महारत हासिल करके ही अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भाषाओं को अच्छी तरह से सीख सकते हैं। शिक्षक और कवि श्री कुलविंदर बच्छोआना ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के इतिहास के बारे में बताया और कहा कि इस दिन की शुरुआत पाकिस्तान के बंगाली लोगों द्वारा अपनी भाषा बांग्ला के लिए किए गए बलिदानों और शहादतों के परिणामस्वरूप हुई। यूनेस्को ने 1999 में इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि भले ही पंजाबियों ने धर्म, न्याय और देश के लिए अंतहीन कुर्बानियां दी हों, लेकिन हममें अपनी भाषा के प्रति वह चेतना और समर्पण नहीं है, जो बंगाल के लोगों में है। स्कूली छात्राओं ज्योति कौर व खुशबीर मट्टू ने मातृभाषा से संबंधित कविताएं प्रस्तुत कीं। इस मौके पर मल्ही वेलफेयर ट्रस्ट के चेयरमैन हरप्रीत रूबल, हरजीत सिंह मठ लेक्चरर, मैडम अमनदीप कौर, गुरध्यान सिंह, कृष्ण सिंह, जयपाल, सुप्रीत कौर, गुरप्रीत सिंह, सिकंदर सिंह, हरमनदीप कौर, करणवीर, ऋतु गोयल, कमलजीत कौर, बिक्रमजीत सिंह मौजूद रहे. , कुलदीप सिंह, रूपिंदर सिंह, रबजोत सिंह, तरुण गोयल, राजपाल कौर आदि शिक्षक उपस्थित थे।

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