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Uttar Pradesh News एक नवंबर से यूपी -दिल्ली के बीच बसों पर सख्ती

 सिर्फ इलेक्ट्रिक, सीएनजी,BS6 बसें दिल्ली जाएंगी

ब्यूरो चीफ अनुभव शाक्य शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश

देश में आज ग्रेटर नोएडा की एयर क्वालिटी सबसे ज्यादा खराब है। दिल्ली-NCR के सभी शहरों की एयर क्वालिटी भी खराब श्रेणी में है। इस सीजन में शायद ऐसा पहली बार हुआ, जब नेशनल कैपिटल रीजन के किसी भी शहर की हवा सामान्य श्रेणी में भी नहीं है। इन सबके बावजूद लोकल अथॉरिटीज दावा कर रही हैं कि पिछले सालों की तुलना में वायु प्रदूषण में कमी आई है। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल के समर एप ने रविवार सुबह 10.05 बजे देश के 232 शहरों की एयर क्वालिटी का इंडेक्स जारी किया। इसके अनुसार, ग्रेटर नोएडा का AQI 336, फरीदाबाद (हरियाणा) का 309 और बल्लभगढ़ (हरियाणा) का AQI 301 है। ग्रेटर नोएडा में नॉलेज पार्क-थर्ड एरिया की एयर क्वालिटी तो 345 तक पहुंच गई है। यहां PM2.5 345 दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट है कि हवा में धूल के कण मोटे हो गए हैं, फेफड़ों के लिए खतरनाक माने जाते हैं। एक नवंबर से सिर्फ इलेक्ट्रिक, CNG, BS6 बसें दिल्ली जाएंगी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने निर्देश दिए हैं कि एक नवंबर से उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच सिर्फ इलेक्ट्रिक, सीएनजी और BS6 डीजल बसों का ही संचालन किया जाए। इसके अलावा अन्य सभी बसों के संचालन पर रोक लगाने की बात कही गई है। यूपी परिवहन निगम इसकी तैयारियों में जुट गया है। माना जा रहा है कि बाकी बसों को गाजियाबाद से आगे दिल्ली की तरफ नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
आखिर है क्या ये PM 2.5 PM 2.5 का पूरा नाम है पर्टिकुलेट मैटर। यह धूल-मिट्‌टी-केमिकल्स आदि के वे छोटे-छोटे कण हैं, जो हवा में हर वक्त मौजूद रहते हैं। ये कण इतने बारीक होते हैं कि एक कण 2.5 माइक्रोमीटर या उससे भी छोटा हो सकता है। ये बारीक कण सांस के जरिए आसानी से हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। हवा के साथ फेफड़ों में और फिर फेफड़ों के रास्ते हमारे खून में पहुंच जाते हैं। खून के जरिए ये कण शरीर की कोशिकाओं तक पहुंच जाते हैं। लंबे समय तक PM 2.5 प्रदूषण में सांस लेने से स्ट्रोक, हृदय रोग और लंग कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

अब हवा में धूल-मिट्‌टी तो होगी ही, लेकिन ये कैसे तय होता है कि एक जगह की हवा साफ है और दूसरे की प्रदूषित है। ये हवा में मौजूद PM 2.5 की मात्रा से तय होता है। यह मात्रा जितनी बढ़ती जाएगी, हवा सांस लेने के लिए उतनी प्रदूषित मानी जाएगी।

NCR, वेस्ट यूपी में इन 4 कारणों से बढ़ रहा प्रदूषण
1.) कंस्ट्रक्शन वर्क- दिल्ली, NCR सहित मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और यहां से जुड़े शहरों में लगातार कंस्ट्रक्शन चल रहा है। मेरठ में रैपिड रेल, मैट्रो रेल, दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे, डेडिकेटेड फ्रैट कॉरिडोर सहित बड़्रे प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य हो रहा है। इन निर्माण कार्यों के कारण लगातार धूल और रेत हवा में उड़ती रहती है। इसकी वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है।
2.) हैवी ट्रैफिक- दिल्ली, NCR और इससे सटे शहरों में लगातार वाहनों का दवाब बढ़ रहा है। मैट्रो की कनेक्टिविटी का विस्तार होने के बाद भी गाजियाबाद, मेरठ और सटे शहरों में वाहनों का लोड कम नहीं हो रहा। वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण हवा जहरीली हो रही है।

3.) इंडस्ट्रियल कंजक्शन- पूरे पश्चिमी यूपी में पेपर मिल, इंक इंडस्ट्री, पेंट इंडस्ट्री, स्टील वर्क, निर्माण सामग्री कारखाने से लेकर सभी बड़ी औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं और वेस्टेज के कारण हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है।

4.) अपशिष्ट जलना- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी भी खेतों में फसलों के अवशेषों को जलाने के कारण हवा में प्रदूषण की परत जम जाती है, जिसके कारण हवा भारी होकर दूषित हो रहा है।

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