Rajasthan News कार्यक्रम की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी आदिवासी योद्धा बिरसा मुंडा व मीना समाज के देवत्व प्राप्त संत घाटीमदेव महाराज व डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्रों के आगे दीप व धूप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित कर की गई।

रिपोर्टर संजय मीणा किशोरपुरा झुंझुनू राजस्थान
राष्ट्रीय मीणा महासभा जिला चूरू के तत्वाधान में आदिवासी मीणा छात्रावास ,चूरू में आज दिनांक 9 अगस्त2023 को विश्व आदिवासी दिवस महासभा के राष्ट्रीय महासचिव व चूरू जिला अध्यक्ष किरोड़ीमल मीना की अध्यक्षता में श्रद्धापूर्वक मनाया गया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेलवे के अधिकारी दिनेश कुमार मीणा व विशिष्ट अतिथि के. एल.मीना ,बाबूलाल मीणा व महासभा के विशेष कार्यकर्ता निर्मला मीना व सुनीता मीना थे।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी आदिवासी योद्धा बिरसा मुंडा व मीना समाज के देवत्व प्राप्त संत घाटीमदेव महाराज व डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्रों के आगे दीप व धूप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित कर की गई। कार्यक्रम में उपस्थित आदिवासी समाज के पुरूष व महिलाओं का स्वागत महासभा के जिला अध्यक्ष किरोड़ीमल मीना द्वारा किया गया व उनका आभार प्रकट किया गया।वक्ताओ ने आदिवासी दिवस मनाए जाने की महता पर खुलकर विचार रखे।मुख्य अतिथि दिनेश कुमार ने अपने उदबोधन में कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जरूरत इस बात की है कि हम आदिवासी मुल्यों व संस्कृति को मजबूती से पुनर्स्थापित करे जिसका वर्तमान समय मे निरंतर ह्रास होता जा रहा है । वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. मोहरसिंह मीना ने अपने उदबोधन में कहा कि आदिवासी समाज हिंदुस्तान का मूलनिवासी है व उनकी संस्कृति शिक्षाप्रद व प्रेरणादायक है।आज सरकार ,समाज,परिवारों को सोचना होगा कि हम कैसे इस संवाहक संस्कृति के पुरोधाओं का सम्मान करें ,इन्हें उचित स्थान दे ।उपाध्यक्ष रोहिताश मीना सरदारशहर ने आदिवासियों के हक हकूकों की रक्षार्थ संगठित होकर लड़ाई लड़ने की बात कही।समाजसेवी डॉ. बी. एल मीना व राजेन्द्र मीना ने अपने उदबोधन में कहा कि स्वतंत्रता सेनानी बीरसा मुंडा ने अपने दर्शन में जनजातीय आदिवासी जीवन शैली से स्वराज संकल्प लिया था उस संकल्प को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्थापित करना आदिवासियों का दायित्व है।विशिष्ट अतिथि के. एल. मीना ने अपने उदबोधन में कहा कि भारतवर्ष में आदिवासी समुदाय आबादी के हिसाब से 12 फीसदी हो चुका है ।आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से जल जंगल व जमीन को पूजता है उन्हें देवता मानता है फिर भी वर्तमान शासन व्यवस्था आदिवासियों की जल, जंगल व जमीन को हड़पने का निरंतर प्रयास कर रही है।तथा उन्हें कब्जे वाले भूभागों से बेदखल करने के हतकंडे अपना रही है जिसको आदिवासी समुदाय कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। महासभा के मुख्य संगठन सचिव झाबरमल मीना ने अपने उदबोधन में आदिवासी मीना समुदाय को वर्गभेद मिटाकर यथा जमीदार, चौकीदार, पड़िहार व रावत मीनाओ को मिलाकर वृहत मीना समाज की स्थापना करनी चाहिए। समाजसेवी ख्यालीराम मीना ने कहा कि आदिवासी मीना समुदाय को शिक्षा को विशेष बढ़ावा देते हुए आने वाली पीढी को शिक्षित करने की बात कही।विशिष्ट अतिथि निर्मला मीणा व सुनीता मीणा ने अपने उदबोधन में आदिवासी संस्कृति को बचाये रखने के लिए परम्परागत पहनावे को नही छोड़ना चाहिए।न ही आचार विचार को छोड़ना चाहिये व बेटियों को सुशिक्षित कर आदिवासी सभ्यता व संस्कृति का ज्ञान करवाने की बात कही।साथ ही विश्व आदिवासी दिवस को अन्य त्यौहारों की तरह मनाये जाने की बात कही।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे किरोड़ीमल मीना ने विश्व आदिवासी दिवस में भागीदारी निभा रहे समाज बंधुओं के सामने समान नागरिक संहिता(यू सी सी) से आदिवासी समुदाय को बाहर रखने सहित एकलव्य पुरस्कार शुरू करने के लिये प्रस्ताव रखा जिसको सर्वसम्मति से भारत सरकार व राज्य सरकार को भिजवाने का अनुमोदन किया गया। तदोपरांत उन्होंने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि सर्वप्रथम विश्व आदिवासी दिवस मनाये जाने की परिकल्पना आज ही के दिन 9 अगस्त 1982 को जेनेवा में की गई थी, जिसको आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 1994 में पूरे विश्व मे आदिवासी दिवस मनाये जाने की घोषणा की गई थी।तब से निरंतर विश्व आदिवासी दिवस प्रति वर्ष 9 अगस्त को लगातार मनाया जा रहा है।पिछले 20 वर्षो से राष्ट्रीय मीणा महासभा की मांग पर ,माननीय अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार द्वारा गत दो वर्षों से आदिवासी दिवस का सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिये उनका आभार प्रकट किया गया व कार्यक्रम समापन किये जाने की घोषणा की।। कार्यक्रम में गिरधारी लाल मीणा, राजीव मीना,नवरत्न मीणा, अनिल मीना,प्रमोद मीना, सुभाषचंद्र मीना, राजुलाल मीना, जमनलाल मीना,भींवराज मीना, ओमप्रकाश मीना, विक्रम मीना ,अजय मीना, अरविंद मीना, विष्णु मीणा, राजेंद्र कुमार मीना, सुखराम मीना, सचिन मीना, मनीष मीना, बलराम मीना, कोमल मीना, ज्योति मीना, दिव्या मीना, निर्मला मीना सवाईमाधोपुर, सुनीता मीना दौसा, मनीष मीना ,शिवराज मीना आदि अनेक आदिवासी मीना समाज के लोग उपस्थित थे।

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