
रिपोर्टर अमित कुमार सिंह पूर्वी चंपारण बिहार
अक्सर देखने और सुनने को मिलती है कि लोगों द्वारा शौचालय टैंक अपने घर या अन्य किसी जगहों पर निर्मित किया जाता है जिसकी ऊपर से ढलाई करवा दिया जाता है एक छोटा सा जगह ढलाई में छोड़ी जाती है जिसमें मिस्त्री या मजदूर प्रवेश कर अपने ढलाई की संटरिंग पंद्रह बीस दिनों के बाद खोल सकें, मजदूर या मिस्त्री जब प्रवेश करते हैं तो ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहोश हो जाते हैं या फिर मौत हो जाती है ऐसी घटना अक्सर देखने या सुनने को मिलती है जो काफी दुःखद है मिस्त्री या लोगों को चाहिए कि उक्त टैंक को बनाते समय तीन चार बड़ा ढक्कन बनायें और प्रवेश करते समय चारो ढक्कन खोल कर ही प्रवेश करे या फिर एक ढक्कन है तो ऑक्सीजन मास्क के बिना नहीं प्रवेश करें, सुनने को मिला है कि बिहार के सहरसा जिला के एक गांव में चार मजदूर शौचालय टैंक में एक एक करके प्रवेश किए और चारों की जान चली गई जो दम घुटने से हुआ जो काफी दुःखद है अतः सावधान रहें सतर्क रहें l

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