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Rajasthan News विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बालेश्वर।

 13 वा ज्योतिर्लिंग के रूप मे हो सकता है घोषित।

रिपोर्टर विकास शर्मा नीमकाथाना राजस्थान

नीमकाथाना के टोडा गांव से 11 किलोमीटर दूर अरावली की वादियों में स्थित बालेश्वर धाम की कहानी पुराणों के साथ अचरज से जुड़ी है। बताया जाता है कि यहां मंदिर में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है। जिसके दूसरे छोर का अब तक पता नहीं चल पाया है। धाम के पुजारी लीलाराम योगी के अनुसार शिवलिंग ज्योर्तिलिंग है। जिसकी करीब 400 साल पहले उन्हीं के पूर्वजों ने खुदाई की थी। उस समय साढ़े तेरह फीट तक शिवलिंग का छोर नहीं मिला था। उसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के हुए हमले से खुदाई को रोकना पड़ा और उसी के चारों ओर मंदिर को रूप दे दिया गया। धाम का जिक्र पुराणों में होने का दावा भी किया जाता है। शिला पर लिखा है लेख, अब तक है अनसुलझा बालेश्वर धाम मंदिर में एक शिलालेख भी है। जिस पर शिव मंदिर को लेकर कोई लेख लिखा हुआ है। लेकिन, उसकी भाषा अब तक अन सुलझी होने की वजह से उसे अब तक पढ़ा नहीं जा सका है। माना जाता है कि यह शिवलिंग के इतिहास से ही जुड़ा ही लेख है। पुजारी व ग्रामीणों का मानना है कि पुरातत्व विभाग क्षेत्र में रुचि लें तो इस शिलालेख को पढऩे के साथ पुराणों से जुड़े कई रहस्य यहां खुल सकते हैं। वहीं, कई ऐतिहासिक साक्ष्य मिलने के साथ इस शिवलिंग को 13वां ज्योतिर्लिंग भी घोषित किया जा सकता है। बालेश्वरधाम का अमृत कुंड भी है बड़ा रहस्य बालेश्वर धाम में अमृत कुंड के नाम से स्थित एक कुंड भी रहस्य बना हुआ है। दरअसल यहां मंदिर के पिछले भाग में गुलर का एक पेड़ है। जिसकी जड़ों में बने इस कुण्ड से लोग पानी निकालकर नहाते हैं। पानी कहां से व कब से आ रहा है, यह कोई नहीं जानता। यह भी चमत्कार ही माना जाता है कि कुंड का पानी कभी खत्म नहीं होता। पूरे साल इसमें पानी भरा रहता है।

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