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केंद्रीय सेवा की ओर बढ़ते कदम: झारखंड के IPS अफसर प्रतिनियुक्ति के लिए तैयार

👉नए नियमों का असर: IPS अधिकारियों में बढ़ी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की होड़

👉सीनियर पदों के लिए केंद्रीय अनुभव अनिवार्य, झारखंड कैडर में हलचल

👉आईजी-डीआईजी स्तर के अफसर केंद्र की ओर, कई फाइलें प्रक्रिया में

राँची: झारखंड पुलिस महकमे में इन दिनों केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है। आईजी और डीआईजी रैंक के कई आईपीएस अधिकारी केंद्र में सेवा देने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों की फाइलें पहले ही आगे बढ़ चुकी हैं और राज्य सरकार से हरी झंडी मिलते ही वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रवाना हो सकते हैं। वहीं, कई अन्य अधिकारी भी आवेदन की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं।

इस बदलाव के पीछे केंद्रीय स्तर पर लागू नए नियम अहम वजह माने जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार अब आईजी जैसे वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकारियों के पास एसपी या डीआईजी स्तर पर कम से कम दो साल का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनुभव होना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह शर्त लागू नहीं थी, जिससे अधिकारी सीधे वरिष्ठ पदों के लिए पात्र हो जाते थे।

नए नियम लागू होने के बाद झारखंड कैडर के अधिकारियों में केंद्र में सेवा का अनुभव हासिल करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। वर्तमान में झारखंड कैडर के 21 आईपीएस अधिकारी पहले से ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। इनमें नवीन कुमार सिंह, बलजीत सिंह, आशीष बत्रा, साकेत कुमार सिंह, कुलदीप द्विवेदी, अभिषेक, अनूप टी मैथ्यू, अनीश गुप्ता, एम तमिल वानन, पी मुरुगन, जया रॉय, शिवानी तिवारी, अखिलेश वॉरियर, अंशुमन कुमार, हरि लाल चौहान, प्रियंका मीणा, सुभाष चंद्र जाट, आर रामकुमार, विनीत कुमार, के विजय शंकर और शुभांशु जैन शामिल हैं।

👉क्या होता है केंद्रीय प्रतिनियुक्ति?

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत राज्य कैडर के आईपीएस अधिकारियों को एक निश्चित अवधि के लिए केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों—जैसे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, इंटेलिजेंस ब्यूरो आदि—में सेवा देने का मौका मिलता है। इससे अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अनुभव मिलता है, जो आगे उनकी पदोन्नति और नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

👉विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों के लागू होने के बाद आने वाले समय में और अधिक आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की ओर रुख करेंगे। इससे न केवल उनकी प्रोफेशनल ग्रोथ होगी, बल्कि राज्य और केंद्र के बीच प्रशासनिक समन्वय भी मजबूत होगा।

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