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Chhattisgarh News जशपुर निर्माण की संकल्पना यहां निवासरत अनु.जनजातियों के सर्वांगीण विकास किया गया

रिपोर्टर पवन कुमार नाग जशपुर छत्तीसगढ़

जशपुर  लेकिन छत्तीसगढ़ बनने के 23 वर्ष बाद भी आदिवासियों के समस्या की तस धारी पड़ी है। छत्तीसगढ़ में 42 जनजाति समुदाय निवासरत है,हर समुदायिक का एक रीति रिवाज संस्कृति,बोली भाषा,रहन सहन खान पान पहनावा सभी विभिन्न विभिन्न के है फिर भी यह जनजाति समुदाय एक साथ भाईचार के साथ निवासरत है,आज भी ये 42 समुदाय के साथ छोटी छोटी आवश्यकता रोटी,कपड़ा,मकान, शिक्षा,स्वास्थ रोजगार जैसे समस्याएं खड़ी है, ऐसी ही समस्या में से एक बहुत गंभीर समस्या जनजाति सामुदायिक के लिए हितकारी साबित होता जा रहा है,जो की छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद जाती के लिखावट उच्चारण विभेद मात्रात्मक त्रुटि तथा कुछ जातियां जन जाति होने के बाद भी इसको सूची में सामिल नही किया गया,जिसके कारण वर्षों में आदिवासी होते हुवे भी जनजाति लोगों को मिलने वाली संवेधानिक अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है,इनमें से प्रमुख जनजाति रौतिया समाज के है , 1872 से अब तक के सभी सरकारी रिकार्ड आदि में राऊती जाति को தியிப்ப்பு பிர்பி (आदिम जनजाति) कहा जाता था, आजादी से पहले ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा राजपत्र में प्रकाशित राजाओं की परिषद में सबसे उत्कृष्ट मेजेस्टी 1936 (भारत सरकार) और 36 सेंट्रल प्राइवेट और बरार में आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजातियों की सूची से बाहर कर दिया गया, जिसमें आधी रौतिया जाति को भी अधिसूचित किया गया। भारत और वॉल्यूम vii 36 जातियों के लिए प्रस्ताव दिया गया था, जिसमें रौतिया जाती भी एक था,लेकिन 1950 की सूची में कुल 34 आदिवासी समुदाय को अनु.जनजाति के रूप में अधिसूचित कर दिया गया,जिसमें रौतिया जनजाति को सूची से पृथक कर दिया गया। उक्त प्रशासकीय भूल के कारण रौतिया जनजाति पिछले 50 – 60 सालों अनभिज्ञ रह जैसे ही ज्ञात हुआ कि रौतिया जनजाति आजादी के पूर्व अनु.जनजाति के रूप में अधिसूचित था,समाज में बेहद आक्रोस के साथ उम्मीद की एक किरण नजर आ रही है,जिसके लिए समाज एक जुट होकर प्रयास शुरू किया। स्थानीय प्रशासन सहित राज्य एवं केन्द्र स्तर पर पिछले 20 वर्षों से रायपुर में और दिल्ली में चक्कर लगा लगा कर थक चुके हैं,थक- हार कर समाज में कठोर निर्णय लेते हुवे अब सड़क की लड़ाई फैसला कर लिया है,इस हेतु विभिन्न चरणों में बैठकों एवं चर्चा परिचर्चा का दौर युद्धस्तर पर किया जा रहा है,रौतिया समाज ने 11 जून 2023 को एक महासम्मेलन आयोजित किया जिसमें 15-20 हजार लोगों की उपस्थिति में एक सुर में कहा है की 30 जून 2023 तक सरकार रौतिया समाज जनजाति का प्रस्ताव केंद्र सरकार को अग्रेसित नहीं करने की स्थिति में लाखों की संख्या में सड़क पर उतर के धरना प्रदर्शन चक्का जाम जैसे उग्र आंदोलन को बाध्य होगा,जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन ही होगी,सामाजिक बंधुगण आज वो समय आ ही गया है,हमने हर ऐसे रास्ते अपनाएं जिससे हमारा काम हो सके लकी दुर्भाग्य है की किसी ने ना देखा,ना समझा ना ही समझने का प्रयास किया और तब समाज कठोर निर्णय लेते हुवे शक्ति प्रदर्शन का अंतिम रास्ता चुना है।

ChatGPT Image Jun 19, 2026, 03_57_34 PM

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