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Rajasthan News भीलवाड़ा अभी तक हमें केवल चार वेद का ज्ञान ही बताया गया वेद 5 होते हैं

रिपोर्टर  मीनादेवी हेमसिंह, भीलवाड़ा राजस्थान।

भीलवाड़ा जिले में 4 तहसील मे एल. ई. डी. के माध्यम से सत्संग संपन्न हुए। शनिवार को बिजोलिया तहसील के गांव मकरेड़ी में, रविवार को 3 तहसील जहाजपुर तहसील के भगुनगर में, करेड़ा तहसील में, व शाहपुरा तहसील के गांव चारमिल दौलतपुरा चौराया मे मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट कुरुक्षेत्र हरियाणा की ओर से जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपालजी महाराज का एक दिवसीय सत्संग समागम हुआ । सत्संग में प्रोजेक्टर(एल. ई. डी.) के माध्यम से जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपालजी जी महाराज ने कबीर सागर से प्रमाणित करके बताया कि कबीर परमात्मा ने सृष्टि रचना के समय सर्वप्रथम ब्रह्म भगवान को पांच वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद और पांचवा सूक्ष्मवेद (कबीरवाणी) दिए। जब इन वेदों को कालरूपी ब्रह्म भगवान ने पढ़ा तो पांचवा सूक्ष्मवेद में कबीर परमात्मा की पहचान और कबीर परमात्मा को प्राप्त करने की विधि लिखी थी. ब्रह्म ने पांचवें सूक्ष्म वेद को नष्ट करके चारों वेद ब्रह्मा जी को दे दिए. तब से अभी तक अन्य संत महात्मा केवल चारों वेदों का ज्ञान ही बता रहे हैं। पांच वेद का प्रमाण रामदेव चौबीस प्रमाण में भी है. ऋग्वेद, यजुर्वेद साथ में सामवेद अथर्वेद हाथ में। सूक्ष्म वेद आप रखाया चारों वेद ब्रह्मा को सूँपाया।। कबीर परमात्मा की वाणी है कि ऋग,यजु, साम,अथर्व चारों वेद चित्तभंगी रे।
पांचवा सूक्ष्म वेद पढ़े जोi सत्संगी रे।। कबीर परमात्मा की सतभक्ति से ही सुख,शांति और मोक्ष होगा अब जनता कबीर परमात्मा का ज्ञान समझ कर कबीर परमात्मा को पहचान रही है। सत्संग को देखकर कबीर परमात्मा का ज्ञान समझ कर 5 श्रद्धालूओ (पुण्य आत्माओं) ने पहली बार सतगुरु रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेकर आजीवन मर्यादा में रहकर भक्ति करने का संकल्प लिया। रामपालजी महाराज का उद्देश्य है कि समाज मे फैली सामाजिक कुरीतियों को जड़ से मिटाना है. संत रामपालजी एक स्वच्छ समाज तैयार कर रहे है जो नशामुक्त, दहेज़मुक्त विवाह रिश्वखोरीमुक्त, अपराधमुक्त और अंधविश्वास मुक्त हो ।

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