Uttar Pradesh News रोहनिया थाने की पुलिस ने मानव तस्करी के मामले का भंडाफोड़ किया है।

रिपोर्टर निखिलेश कुमार मिश्रा वाराणसी उत्तर प्रदेश
वाराणसी : रोहनिया थाने की पुलिस ने मानव तस्करी के मामले का भंडाफोड़ किया है। इस संबंध में दंपती समेत तीन आरोपितों को देर रात मिल्कीचक के पास से गिरफ्तार कर उनके कब्जे से अपहृत दो किशोरियों को मुक्त कराया गया। दोनों को हीरोइन बनाने का सपना दिखा कर आर्केस्ट्रा संचालकों के हाथ सौदा करने की तैयारी थी। गिरफ्तार आरोपितों में रोहनिया के परमानंदपुर निवासी चंदन सोनकर, उसकी पत्नी तथा शिवपुर विंध्याचल कोतवाली, मीरजापुर निवासी राजू सोनकर शामिल हैं। आरोपितों का कहना था कि यही हम लोगों का धंधा व आय का स्रोत है। 19 अप्रैल को निकली थीं स्कूल जाने के लिए पुलिस के मुताबिक गत 19 अप्रैल को केशरीपुर व भुल्लनपुर निवासी दोनों किशोरियां घर से स्कूल जाने के लिए निकली थीं। इसके बाद वे न तो स्कूल और न ही घर पहुंची। उनके स्वजन ने दोनों की बहुत खोजबीन की लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला तो पुलिस को सूचना दी गई। रोहनिया पुलिस अपहरण का मामला दर्ज कर किशोरियों की तलाश में लग गई। इस बीच पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि गायब दोनों किशोरियों के साथ एक महिला व दो पुरुष कहीं भागने की फिराक में सवारी गाड़ी का इंतजार कर रहे हैं।
पुलिस ने किया गिरफ्तार
जानकारी मिलते ही पुलिस ने आरोपितों को दबोच लिया। कैद कर रखे थे कमरे मेंआरोपितों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि हम तीनों लोग मिलकर लड़कियों को बहला-फुसलाकर हीरोइन बनाने का सपना दिखाते हैं और इसके बाद आर्केस्ट्रा के मालिकों से सौदा तय करके डांस के धंधे में लगा देते हैं। दोनों किशोरियों को भी हीरोइन बनाने का झांसा दिया और बहला-फुसलाकर अपने पास एक कमरे में रखे थे।
आर्केस्ट्रा में थी बेचने की तैयारी
इस बीच आर्केस्ट्रा चलाने वाले मालिकों से संपर्क करके उन्हें बेचने का प्रयास किया लेकिन कोई लेने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद दोनों लड़कियों को मीरजापुर भेजने के लिए किसी साधन का इंतजार कर रहे थे कि तभी पकड़ लिए गए। तीनों के विरुद्ध धारा 363 व 370 (4) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपित चंदन व राजू का मोबाइल फोन कब्जे में लिया है। दोनों के काल डिटेल की भी जांच की जा रही है। क्या है धारा 370 (4)जो भी कोई एक से अधिक नाबालिग की तस्करी का अपराध करेगा तो उसे कम से कम 14 वर्ष का कठोर कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है से दंडित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा। यह एक गैर जमानती धारा है। संज्ञेय अपराध और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।


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