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Rajasthan News जज्बा : भाण्डारेज के हर्षवर्धन सिंह का हुआ वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स के लिए चयन

6 साल पहले माँ ने किडनी देकर बचायी थी जान, अब बेटा करेगा 23वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व

रिपोर्टर संजय मीना झुंझुनू राजस्थान

भांडारेज कस्बे के मूल निवासी हर्षवर्धन सिंह की वर्ष 2017 में किडनी ख़राब हो गयी | जब इनके परिवार ने इनके बचने की सारी उम्मीदे खो दी थी तब डॉक्टर ने इन्हें बचाने का एक मात्र उपाय किडनी ट्रांसप्लांट बताया | इनकी माताजी जी श्रीमती दुर्गेश कँवर ने बिना कुछ सोचे अपना एक गुर्दा इन्हे दान कर दिया और आज दोनों लोग स्वस्थ जीवन जी रहे हैं | हर्षवर्धन 2019 व 2022 में आयोजित नेशनल ट्रांसप्लांट गेम्स में पदक विजेता हैं और रोटरी क्लब व अन्य सामाजिक संस्थाओ के सहयोग से लोगों को गुर्दा रोग व अंगदान के प्रति जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं |

हर्षवर्धन सिंह ने बताया किसी की “किडनी, लिवर, ह्रदय ख़राब हो जाने का मतलब हम जीवन का अंत समझते हैं और हमारे देश में अधिकतर लोगों की सोच है कि अगर इन अंगो का प्रत्यारोपण भी करवा लिया जाए तो जीवन सामान्य नहीं रहता, लेकिन इस सोच को सिरे से झुटलाकर प्रदेश के कुछ युवा वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2023 में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं | वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स वर्ष 1978 से ओलंपिक एसोसिएशन के सहयोग से हर दो वर्ष के अंतराल पे अलग अलग देशो में आयोजित किया जाता हैं, इस वर्ष वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स का आयोजन ऑस्ट्रेलिया में 15 से 21 अप्रैल को होगा जिसमे भारत की और से 30 खिलाडी विभिन्न खेलों व श्रेणियों में दुनिया भर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे | मैं अंग ट्रांसप्‍लांट कराने वाले लोगों को दिखाना चाहता हूं कि ट्रांसप्‍लांट कराने के बावजूद आप नार्मल और हेल्‍थी लाइफ जी सकते हैं। मेरे इस कदम ने कई सालों से मेरा इलाज कर रहे डॉक्‍टरों को भी प्रेरित किया है। मैं पहले बहुत फिट था। अचानक से मेरी हालत बहुत खराब हुई और एक समय ऐसा आया जब मैं बिस्‍तर से जकड़ गया था। ट्रांसप्‍लांट कराने के छह महीने के बाद मैं चलने लायक हुआ और अब देश का प्रतिनिधित्व अंतरास्ट्रीय स्तर पे करने के लिए तैयार हूं।”

अंगदाता श्रीमती दुर्गेश कँवर ने बताया “लोग अंगदान से डरते हैं और यह डर उनके अपने परिवार के सदस्यों, लोगों को, जिन्हें वे कहते हैं कि वे प्यार करते हैं, मरने की अनुमति देता है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है !! क्योंकि डर एक अनुत्तरित प्रश्न से आता है | “

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