25 साल पुराने वासेपुर डबल मर्डर केस का भगोड़ा फिर चर्चा में, छत्तीसगढ़ में पुलिस दबिश के दौरान फरार

👉फहीम खान की मां और मौसी के हत्याकांड का दोषी शब्बीर फिर पुलिस को चकमा देकर भागा
👉वासेपुर गैंगवार का फरार दोषी अंबिकापुर में मिला, गिरफ्तारी से पहले हुआ फरार
👉2001 के चर्चित डबल मर्डर केस में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, आरोपी फिर हाथ से निकला
👉25 साल पुराने खूनी संघर्ष का भगोड़ा आरोपी फिर सुर्खियों में, तलाश तेज
धनबाद: वासेपुर की चर्चित गैंगवार से जुड़े वर्ष 2001 के डबल मर्डर केस का फरार दोषी शब्बीर आलम एक बार फिर चर्चा में है। धनबाद पुलिस को सूचना मिली थी कि वह छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित सरगुजा जिले के मोमिनपुर इलाके में बदली हुई पहचान के साथ रह रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने वहां सादे कपड़ों में दबिश दी, लेकिन कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। अब उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश और तेज कर दी गई है।
18 अक्टूबर 2001 को धनबाद के डाइमंड क्रॉसिंग के पास दिनदहाड़े फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड में शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। घटना ने उस समय पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी।
हत्या के बाद शब्बीर लंबे समय तक फरार रहा। वर्ष 2013 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन अदालत में पेशी के दौरान वह पुलिस हिरासत से भाग निकला। बाद में वर्ष 2018 में धनबाद की अदालत ने शब्बीर, उसके भाई शाहीद सहित सभी सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन शब्बीर अब तक गिरफ्त से बाहर है।
हालिया सूचना के आधार पर धनबाद पुलिस ने छत्तीसगढ़ में दबिश दी। बताया जाता है कि कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध के बीच आरोपी को पुलिस की मौजूदगी की भनक लग गई और वह मौके से फरार हो गया। इसके बाद सरगुजा पुलिस ने इलाके में नाकाबंदी भी की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
पुलिस के अनुसार शब्बीर आलम के संभावित ठिकानों और उसके नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरार दोषी की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई जारी है।
गौरतलब है कि फहीम खान और शब्बीर आलम के बीच वर्चस्व की लड़ाई कोयला, स्क्रैप, एजेंटी और रंगदारी के अवैध कारोबार को लेकर शुरू हुई थी। इसी गैंगवार में कई लोगों की जान गई और वर्ष 2001 का यह डबल मर्डर धनबाद के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया। अब 25 साल पुराने इस मामले के फरार दोषी की गिरफ्तारी पर सभी की नजरें टिकी हैं।


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