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Chhattisgarh News : ‘मौत की दुकान’ का भंडाफोड़! डिग्री मांगने पर BJP नेता से दिलवाई FIR की धमकी

झोलाछाप नेटवर्क पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा भाटापारा / निपनिया, जिला- बलौदाबाजार-भाटापारा।

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सो चुका है? क्या किसी सत्ताधारी नेता का नाम लेते ही कानून के हाथ बंध जाते हैं? भाटापारा ब्लॉक के ग्राम निपनिया से सामने आई खौफनाक जमीनी हकीकत तो यही बयां कर रही है!
निपनिया गांव आज की तारीख में कथित ‘झोलाछाप डॉक्टरों’ और फर्जी क्लिनिकों की गिरफ्त में है, जहां मासूम ग्रामीणों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। पर सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस खुले खेल पर आंखें मूंदकर क्यों बैठा है?
आयुर्वेद का चोला, एलोपैथी का ‘जहर’!
स्थानीय ग्रामीणों के होश उड़ा देने वाले खुलासे के मुताबिक, निपनिया में मुकेश कुर्रे नाम का व्यक्ति क्लिनिक चला रहा है। मुकेश कुर्रे खुद को ‘आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर’ बताता है, लेकिन क्लिनिक के भीतर का सच रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बिना किसी वैध एलोपैथिक डिग्री और बिना ड्रग लाइसेंस के, इस क्लिनिक में धड़ल्ले से भारी-भरकम एंटीबायोटिक दवाइयां, हैवी स्टेरॉयड और जानलेवा हाई-डोज़ इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। बिना किसी जांच-पड़ताल और विशेषज्ञ सलाह के ग्रामीणों को ‘मौत का डोज’ परोसा जा रहा है। अगर गलती से भी दवा का रिएक्शन हो जाए, तो निपनिया में किसी भी दिन बड़ी जनहानि या दुर्घटना हो सकती है।


कैमरा ऑन होते ही ‘नेताजी’ को फोन… पत्रकार को FIR की धमकी!
इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब मीडिया की टीम मौके पर पहुँची और क्लीनिक के संचालन, मान्यता व लाइसेंस को लेकर सवाल पूछे।
वैध डिग्री या कागजात दिखाने के बजाय क्लीनिक संचालक मुकेश कुर्रे ने सरेआम राजनीतिक धौंस दिखाना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज में साफ़ दिख रहा है कि संचालक ने फौरन अपने मोबाइल से BJP के प्रदेश स्वास्थ्य प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आर. जे. ठाकुर (Dr. Rameshwar Thakur) के नाम पर दर्ज नंबर पर कॉल लगा दिया।
कॉल पर बात करते हुए कथित नेताजी द्वारा पत्रकार से ही उल्टा सवाल पूछा गया कि “औचक निरीक्षण करने का क्या आदेश है?” और पत्रकारिता के निष्पक्ष सवालों का जवाब देने के बजाय क्लिनिक संचालक को निर्देश दिया गया कि “थाने जाकर तुरंत पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज करवाओ।”
कैमरे और माइक के सामने ही राजनीतिक रसूख की धौंस देकर पत्रकार को डराने और पुलिस केस में फंसाने की धमकी दी गई। ग्रामीणों में चर्चा है कि इसी ‘नेताजी की छत्रछाया’ के कारण यह फर्जी डॉक्टर इतना बेखौफ है कि इसे न तो स्वास्थ्य विभाग का डर है और न ही पुलिस-प्रशासन का!
लाचार प्रशासन, लाचार कानून? स्वास्थ्य विभाग पर सीधा प्रहार
आखिर किसके इशारे पर निपनिया में ‘मौत की दुकानें’ सजाई गई हैं?
* क्या स्वास्थ्य विभाग (CMHO) सिर्फ किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
* क्या सत्ताधारी पार्टी के नेता का नाम आते ही अधिकारियों के हाथ-पांव फूल जाते हैं?
* क्या कागजी निरीक्षण का ढोंग रचकर आम जनता को मरने के लिए छोड़ दिया गया है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो बिना डिग्री एलोपैथिक इंजेक्शन लगाना सीधे तौर पर ‘गैर-इरादतन हत्या के प्रयास’ जैसा है। इसके बावजूद लंबे समय से शिकायतों और मीडिया द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद भी विभाग का मौन रहना दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली होने का इशारा कर रहा है।
आक्रोशित ग्रामीणों का अल्टीमेटम: 4-सूत्रीय मांग
निपनिया के उग्र ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और CMHO बलौदाबाजार-भाटापारा के सामने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए 4 मांगें रखी हैं:
* तत्काल रेड व सील: निपनिया समेत पूरे भाटापारा क्षेत्र के फर्जी क्लिनिकों पर तुरंत छापेमारी कर उन्हें सील किया जाए।
* डिग्री व लाइसेंस का सच: मुकेश कुर्रे समेत तमाम संचालकों की डिग्रियों, पंजीयन और मेडिकल काउंसिल के दस्तावेजों की गहन सार्वजनिक जांच की जाए।
* FIR और जेल: बिना वैध मेडिकल पात्रता के एलोपैथी इलाज करने और कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को धमकाने वालों पर सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज कर जेल भेजा जाए।
* स्पेशल टास्क फोर्स: क्षेत्र में स्वास्थ्य माफियाओं का सफाया करने के लिए नियमित जांच अभियान चलाया जाए।
बड़ा सवाल:
निपनिया का यह ‘डेथ नेटवर्क’ अब केवल एक क्लिनिक का मामला नहीं रहा, यह शासन-प्रशासन की साख की परीक्षा है। क्या बलौदाबाजार-भाटापारा का जिला प्रशासन इन दबंग और फर्जी डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई करेगा? या फिर बीजेपी नेता की टेलीफोनिक धौंस और धमकी के आगे पूरा प्रशासनिक अमला नतमस्तक हो जाएगा?
जनता जवाब मांग रही है, और नजरें अब कलेक्टर और CMHO की कार्रवाई पर टिकी हैं!

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