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Uttar Pradesh News : 14 साल बाद प्रबल हत्याकांड में इंसाफ, सात दोषियों को उम्रकैद

प्रत्येक दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना, 90 प्रतिशत राशि मृतक की बहन प्राची अग्रवाल को देने के आदेश

रिपोर्टर नौरोज़ हैदर बिजनौर उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर के बहुचर्चित प्रबल प्रताप हत्याकांड में करीब 14 वर्ष बाद न्याय का इंतजार खत्म हो गया। शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट-2 के न्यायाधीश शहजाद अली ने मामले में सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया तथा जुर्माने की 90 प्रतिशत राशि मृतक प्रबल की बहन प्राची अग्रवाल को दिए जाने का आदेश दिया। दोषियों में संजय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, विनय अग्रवाल, राहुल गुप्ता, आशीष अग्रवाल उर्फ रीशू, निखिल अग्रवाल और अनुज गुप्ता शामिल हैं। फैसले के दौरान न्यायालय परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।मामला 19 दिसंबर 2012 का है। शहर के शहनाई बैंक्वेट हॉल में आयोजित महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह के दौरान 18 वर्षीय प्रबल प्रताप की कुछ लोगों से कहासुनी हो गई थी। आरोप है कि विवाद के बाद आरोपियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे वह बेहोश हो गया। बाद में एक निजी चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना को छिपाने के उद्देश्य से आरोपियों ने शव को गंगा नदी में फेंक दिया। परिजनों ने पहले गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 27 दिन बाद, 15 जनवरी 2013 को गंगा किनारे प्रबल का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम में मारपीट से मौत की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने सातों आरोपियों के विरुद्ध अपहरण और हत्या सहित अन्य धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया।
करीब 13 वर्ष 7 माह तक चली सुनवाई के दौरान 305 पेशियां हुईं और 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 29 जुलाई को अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि शुक्रवार को सजा सुनाई गई।


प्रबल की हत्या का सदमा उनके पिता आलोक अग्रवाल सहन नहीं कर सके और घटना के लगभग छह माह बाद हृदयाघात से उनका निधन हो गया। इसके बाद बहन प्राची अग्रवाल ने पूरे मामले की कानूनी लड़ाई जारी रखी। फैसला सुनाए जाने के बाद वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला है। हालांकि परिवार को दोषियों के लिए फांसी की सजा की उम्मीद थी, फिर भी वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उनके भाई को न्याय मिला है।

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