जिला पंचायत अध्यक्ष के एक बयान ने पूरे पत्रकार जगत में हलचल पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित किसानों के कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि “100 में से एक पत्रकार ऐसा है, जो मेरे जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद आया और पैसे की मांग की, अन्यथा बदनाम बरबाद करने की धमकी दी।”
हालांकि, इतने गंभीर आरोप के बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष उस कथित पत्रकार का नाम सार्वजनिक नहीं किया, जिससे अब यह मुद्दा पत्रकारों के बीच चर्चा और नाराजगी का कारण बन गया है।
फोन पर पूछे गए सवाल, मिला तीखा जवाब
जब इस पूरे मामले में स्पष्टता के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष से दूरभाष के माध्यम से संपर्क किया गया, तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय सवाल करने वाले पत्रकार पर ही पलटवार कर दिया। उन्होंने कहा—
“आप क्यों कूद रहे हैं? जिनको बोला गया है, वो नहीं कूद रहे, तो आपको क्या परेशानी है?”
इतना ही नहीं, उन्होंने शर्त रखते हुए कहा कि यदि इस विषय पर जानकारी चाहिए, तो पहले नगरी-सिहावा क्षेत्र में अफीम की खेती को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर बाइट लानी होगी, तभी वे उस पत्रकार का नाम बताएंगे।
पत्रकार जगत में आक्रोश
जिला पंचायत अध्यक्ष के इस रवैये को पत्रकारिता की गरिमा पर सवाल उठाने वाला बताया जा रहा है। बिना नाम उजागर किए पूरे समुदाय पर सवाल खड़ा करना, और फिर जानकारी देने के लिए शर्त रखना—इन दोनों बातों को लेकर पत्रकारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कई पत्रकारों का कहना है कि यदि कोई आरोप है तो उसे प्रमाण सहित सार्वजनिक किया जाना चाहिए, अन्यथा यह पूरे मीडिया जगत की छवि धूमिल करने का प्रयास माना जाएगा।
उठ रहे बड़े सवाल
आखिर उस कथित पत्रकार का नाम क्यों छिपाया जा रहा है?
क्या यह बयान केवल राजनीतिक मंच से दिया गया एक भावनात्मक आरोप था?
या फिर इसके पीछे कोई और सच्चाई है जिसे सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है?
फिलहाल, यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक और मीडिया—दोनों क्षेत्रों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।