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शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें मुख्यमंत्री ने एक दिवसीय”कर्मयोगी बने”कार्यशाला को किया संबोधित

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “कर्मयोगी बनें” की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं है, राष्ट्र के भविष्य की कार्यशालाएं हैं। भगवद्गीता में कहा गया है कि कर्म को उत्कृष्टता और दक्षता के साथ करना ही योग है। आज जब हम “कर्म योगी शिक्षाविद्” की बात करते हैं, तो हम केवल एक आदर्श नहीं गढ़ रहे, बल्कि एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें। संस्थान नियमों के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिये संचालित हों। विद्यार्थी केवल नौकरी न खोजें, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। हमें शिक्षण को अधिक प्रासंगिक और जीवन सापेक्ष बनाना होगा। अनुसंधान की सामाजिक उपयोगिता पर भी और ध्यान अपेक्षित है। डिग्री और रोजगार के बीच जो दूरी है, उसे हमें खत्म करना होगा।सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय आरंभ किया गया है। उद्योगों में अलग-अलग दक्षता वाले कर्मियों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वहां के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई आदि तकनीकी संस्थाओं में कोर्स आरंभ कर रही है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और युवा अपनी क्षमता और योग्यता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इन्हीं गतिविधियों से कर्मयोगी बनने का स्वप्न साकार होगा। ‘कर्मयोगी बने’ कार्यशाला एक गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास है। कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी के सदस्य जेएनयू नई दिल्ली की कुलपति यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के कन्वीयर आयुक्त उच्च शिक्षा एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव और शिक्षाविद उपस्थित थे।

 

Bhopal Madhya Pradesh News @ Reporter Devendra Kumar Jain

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