मजदूर आंदोलन के अगुवा शक्तिनाथ महतो की शहादत पर उमड़ा जनसैलाब, शक्ति मेला आज से…”

👉“त्याग और संघर्ष के प्रतीक शहीद शक्तिनाथ महतो को नमन, शहादत दिवस पर भव्य आयोजन”
👉 “सिजुआ से तेतुलमुड़ी तक श्रद्धांजलि की गूंज, शुरू हुआ नौ दिवसीय शक्ति मेला”
👉 “मजदूरों की आवाज़ थे शक्तिनाथ महतो, शहादत दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि”
👉 “आंदोलनकारी विरासत को सलाम—शहीद शक्ति महतो की याद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला”
कतरास:
मजदूरों के हक की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीद शक्तिनाथ महतो की याद में शुक्रवार को तेतुलमुड़ी, तेतुलमारी और टाटा सिजुआ बारह नंबर स्थित समाधि स्थल पर शहादत दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। सुबह से ही आमजन, स्वजन, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की भीड़ शहीद की प्रतिमा और समाधि स्थल पर उमड़ पड़ी। सभी ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
शक्तिनाथ महतो का सफर केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संघर्ष, आंदोलन, त्याग और सामाजिक जागरण का इतिहास है।
2 अगस्त 1948 को तेतुलमुड़ी की साधारण किसान परिवार में जन्मे शक्ति ने मजदूरों को सूदखोरों से मुक्ति दिलाने और न्यूनतम मजदूरी के लिए निर्णायक संघर्ष छेड़ा। विनोद बिहारी महतो से जुड़ने के बाद 1971 में शिवाजी समाज की जोगता थाना कमेटी बनी, जिसमें उन्हें मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
उन्होंने बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशामुक्ति के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया और समाज को शिक्षित करने के लिए रात्रि विद्यालय की शुरुआत की। आपातकाल के दौर में वे 22 महीनों तक जेल में रहे। कई बार उन पर हमले हुए, लेकिन वे डटे रहे। अंततः 28 नवंबर 1977 को सिजुआ में उन पर बम और गोली से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई।
👉शहादत दिवस की तैयारियां पूरी, श्रद्धांजलि कार्यक्रम संपन्न
तेतुलमुड़ी और सिजुआ में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि मजदूरों के इस महान नायक का आंदोलन आज भी जनमानस में जीवित है। शहीद शक्ति के विचारों और संघर्ष की याद में पूरे दिन श्रद्धांजलि और संकल्प सभाएँ आयोजित की गई है।
👉आज से शुरू नौ दिवसीय ‘शक्ति मेला’ – संस्कृति और लोक परंपरा का संगम
शहीद शक्तिनाथ महतो की स्मृति में टाटा सिजुआ 12 नंबर (आजाद सिजुआ) स्थित समाधि स्थल पर नौ दिवसीय शक्ति मेला का शुभारंभ किया जा रहा है।
👉कार्यक्रमों की रूपरेखा इस प्रकार है:
29 नवंबर: शक्ति शिक्षण संस्थान के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति
30 नवंबर: पारंपरिक झूमर
1 दिसंबर: भक्ति जागरण
2 दिसंबर: आदिवासी यात्रा
3 दिसंबर: छऊ नृत्य
4 दिसंबर: लोकगीत संध्या
5 दिसंबर: ऑर्केस्ट्रा
6 दिसंबर: बंगला सांस्कृतिक कार्यक्रम
स्थानीय लोगों में मेले को लेकर उत्साह दिख रहा है। आयोजकों के अनुसार हर दिन बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी की उम्मीद है।

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