बालाजी मंदिर में बुधवार को संपन्न हुआ इरूमुड़ी विधान, हर्षोल्लास के साथ हुए शबरीमाला रवाना

मंडल दीक्षा पुर्ण कर चुके अय्यप्पा स्वामी के भक्तों ने बालाजी मंदिर परिसर में इरूमुड़ी विधान संपन्न किया। 41 दिनों की अपनी दीक्षा पूर्ण कर चुके अय्यप्पा स्वामी के भक्त रविवार शाम जगदलपुर से शबरीमाला के लिए रवाना हो गए हैं। श्री बालाजी मंदिर से निकले उपासक अग्रसेन चौक होते माँ दंतेश्वरी मंदिर पहुंचे। दंतेश्वरी मंदिर के लिए पैदल रवाना हुए उपासकों को विदा करने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इरुमुड़ी विधान के पश्चात श्री बालाजी मंदिर में उपासकों द्वारा भंडारे का आयोजन भी किया गया था, जिसमें शामिल होकर सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर बस्तर जिला आंध्र समाज और श्री बालाजी टेंपल कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों के अलावा उपासकों के परिजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। इरूमुड़ी पुजा के तहत गुरु स्वामी चप्पा श्रीनिवास राव, बीडीवी जगदीश, एसवीआरवी प्रसाद, के. कामेश्वर, वानरासी श्रीनिवास राव, इंटी मंगराजु, के वेंकटरमणा, सीएच रामकृष्णा, इंटी अर्जुन, शिवा पटनायक, सिम्हाद्री श्रीनु, आर नवीन, इंटी मनोहर, सिद्धार्थ राव आदि उपासकों ने अपने परिजनों और इष्ट मित्रों की उपस्थिति में विशेष पूजा अर्चना किया। उपासक आगामी 28 नवम्बर को शबरीमाला मंदिर में भगवान अय्यप्पा स्वामी के दर्शन करेंगे।

इस बाँधी गई इरुमुड़ी (पूजा सामग्री की गठरी) सर पर रख कर दर्शन के लिए रवाना होने वाले भक्तों में अय्यप्पा मंदिर में रहकर मंडल दीक्षा में लीन वैकुंठ राव, रूद्र वीनु, अर्जुन सिंह परिहार, बिनू पणिक्कर, कृष्णा राव, के ब्रह्मा सोनी, कन्हैया माधवानी, आदि नायर, समीर तिवारी आदि शामिल हैं। सभी उपासक पूजन सामग्री से भरी गठरी लेकर शबरीमाला रवाना हुए हैं। बता दें कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किमी की दूरी पर पत्तनमतिट्टा जिले के पेरियार टाइगर रिजर्वक्षेत्र में श्री अय्यप्पा मंदिर स्थित है। सर पर रखी गठरी में भक्त नारियल के अंदर भर कर रखी घी, चांवल, श्रृंगार सामग्री, हल्दी-कुमकुम आदि पूजन सामग्री बांधकर शबरीमाला जाते हैं। शबरीमाला मंदिर में नारियल में रखी घी से दीप प्रज्वलित कर अन्य पूजन सामग्री मंदिर में चढ़ावे के रूप में चढ़ाते हैं। दरअसल इरुमुडी दो हिस्सों में बांधी जाती है, एक तरफ पूजन सामग्री होती है तो दूसरी तरफ भक्तों के दैनिक इस्तेमाल का सामान रखते हैं। जत्थे में शामिल के कामेश राव ने बताया कि 28 नवंबर को शबरीमाला में दर्शन के पश्चात केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश राज्यों के विभिन्न धार्मिक स्थलों में दर्शन करने के बाद जत्था 5 दिसंबर को वापस शहर लौटेगा।

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