आरएसएस शताब्दी पर भारत सरकार द्वारा जारी विशेष डाक टिकट एवं स्मारक सिक्का — 1963 के राजपथ मार्च की स्मृति अक्षुण्ण

👉गणतंत्र दिवस 1963 की याद ताज़ा — आरएसएस के 100 वर्ष: मोदी करेंगे आज डाक टिकट व ₹100 रुपये का शिल्पित सिक्का लोकार्पण
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2025 — आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी वर्ष की आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में विशेष डाक टिकट एवं स्मारक सिक्का जारी करेंगे। यह अवसर आरएसएस की 100 वर्षीय यात्रा को एक ऐतिहासिक स्मारक प्रदान करने का है।
आरएसएस की स्थापना 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेगड़ेवार द्वारा की गई थी।
संगठन ने वर्षों में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, और राष्ट्र-निर्माण गतिविधियों में योगदान दिया है, विशेषतः आपदा राहत, शिक्षा, सामाजिक समरसता आदि क्षेत्रों में।
एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षण तब आया जब 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों ने राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर अनुशासित कदमताल की थी। वह मार्च तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर हुआ था, जिन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान आरएसएस कार्यकर्ताओं की सेवा को स्वीकार किया था।
यह कदमताल आरएसएस के लिए गर्व का प्रतीक बन गई है और इस क्षण को संगठन इतिहास में अक्सर स्मरण करता है
👉आज का कार्यक्रम: डाक टिकट और स्मारक सिक्का
आज जारी किया जाने वाला सिक्का ₹100 मूल्य का शुद्ध चांदी का सिक्का होगा।
सिक्के के एक ओर राष्ट्रीय प्रतीक (लायन कैपिटल ऑफ अशोक) अंकित रहेगा, और दूसरी ओर भारत माता की वरद मुद्रा छवि, एक सिंह, और तीन स्वयंसेवकों का श्रद्धांजलि स्वरूप सम्मान करते हुए चित्र होगा।
इसका एक अनूठा बिंदु यह है कि यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा जब भारत माता का चित्र मुद्रा पर प्रतिबिंबित होगा।
इस सिक्के पर संघ का मूल वाक्य “Rashtraya Swaha, Idam Rashtraya, Idam Na Mama” अंकित होगा।
डाक टिकट पर 1963 की उस ऐतिहासिक कदमताल की छवि अंकित होगी, जिसमें स्वयंसेवक राजपथ पर मार्च करते दिखाए गए हैं।
👉मोदी के संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह घटना — “1963 का मार्च” — संघ के लिए न केवल गौरव का क्षण है, बल्कि सेवा और राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रमाणित करती है। उन्होंने संघ की यात्रा को “त्याग, निःस्वार्थ सेवा, राष्ट्र निर्माण और अनुशासन की मिसाल” कहा है।
मोदी ने संघ की पांच परिवर्तनात्मक संकल्पनाएँ — आत्म-जागरूकता, सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक उत्थान, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण-चेतना — को आज के युग के लिए महत्वपूर्ण प्रस्तावित किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि संघ ने प्रत्येक युग की चुनौतियों का सामना किया है — स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय सीमाओं की रक्षा, सामाजिक असमानता, अलगाववाद आदि — और सदैव “Nation First, एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को आगे बढ़ाया है।
👉उत्सव में उपस्थित
इस कार्यक्रम में संघ के साधारण सचिव (Sarkaryavah) दत्तात्रेय होसबाले, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं संघ के कार्यकर्ता उपस्थित होंगे।
आज का दिन माहा नवमी अर्थात नवरात्रि की नवमी तिथि है, और कल विजयदशमी है; मोदी ने इस धार्मिक समय को विशेष महत्व देते हुए इसे “सत्य परधर्म की विजय” के प्रतीक स्वरूप भी संबोधित किया।

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