
बिहार बन रहा है पुलों का प्रदेश, नदियों पर बिछ रहा विकास का जाल
पटना, 26 अगस्त –
बिहार अब तेजी से पुलों का प्रदेश बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में वर्ष 2005 से पुल निर्माण कार्यों में अभूतपूर्व तेजी आई है। पिछले दो दशकों में राज्य में नदियों पर 15 बड़े पुल बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 21 और पुलों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
राज्य की जीवनरेखा कही जाने वाली गंगा नदी पर अब तक 8 पुल चालू हैं, 9 निर्माणाधीन हैं और 3 पुलों की योजना पर कार्य शुरू हो चुका है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औंटा-सिमरिया पुल का उद्घाटन किया। यह 6 लेन का पुल 8.15 किलोमीटर लंबा है और इसे देश का सबसे चौड़ा पुल माना जा रहा है। इसके शुरू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन और सशक्त हुआ है।
सोन, गंडक और कोसी नदियों पर भी रिकॉर्ड निर्माण
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सोन नदी पर अब तक 5 पुल तैयार हो चुके हैं। एक पुल निर्माणाधीन है और दो को मंजूरी मिल चुकी है। नया सातवां पुल कोइलवर से 10 किलोमीटर दूर बिंदौल और कोशीहान के बीच बनेगा, जबकि पंडुका घाट पुल डेहरी ऑन सोन से अकबरपुर-सदुनाथपुर मार्ग को जोड़ेगा, जिससे उत्तर प्रदेश को भी लाभ मिलेगा।
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गंडक नदी पर 7 पुल तैयार, 3 निर्माणाधीन और 4 प्रस्तावित हैं।
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कोसी नदी पर 4 पुल पहले से चालू, 3 निर्माणाधीन हैं। मधुबनी के भेजा से सुपौल के बकौर तक बनने वाला 10.02 किलोमीटर लंबा पुल देश का सबसे लंबा पुल होगा। यह भारतमाला परियोजना के तहत 1200 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है। इसके चालू होते ही मधुबनी और सुपौल के बीच की दूरी 30 किलोमीटर घट जाएगी।
तीन घंटे में पटना पहुंचने का सपना
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के किसी भी हिस्से से तीन घंटे में पटना पहुंचा जा सके। इसके लिए नदियों पर मजबूत पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इन पुलों से न सिर्फ परिवहन सुगम हो रहा है, बल्कि राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिल रही है।
विकास की नई राह
बिहार में हो रहा यह पुल निर्माण कार्य राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को आपस में जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है।



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