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“‘सूत्र को मूत्र समझते हैं’ – तेजस्वी के बयान पर भाजपा का तीखा हमला”

तेजस्वी यादव की ‘सूत्र’ टिप्पणी पर बवाल, भाजपा ने बताया प्रेस का अपमान | माफी की मांग तेज

पटना, 14 जुलाई
राजद नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की एक आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने मीडिया सूत्रों को लेकर की गई टिप्पणी में कहा, “हम ऐसे सूत्र को मूत्र समझते हैं, जो दुर्गंध फैलाता है।” इस बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा विरोध जताया है।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद डॉ. संजय जयसवाल ने तेजस्वी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,

“तेजस्वी यादव की समस्या यह है कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं। उनके घर में जो रटवाया जाता है, वही बोलते हैं। जब सवाल दायरे से बाहर होता है तो वे अभद्रता पर उतर आते हैं।”

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस बयान को “प्रेस का अपमान” बताते हुए कहा कि तेजस्वी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

“प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसका अपमान किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

भाजपा पिछड़ा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री निखिल आनंद ने भी तेजस्वी यादव की भाषा और सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा,

“तेजस्वी पर गलत संगत और संस्कारों का असर साफ दिख रहा है। मीडिया के सामने उनका व्यवहार शर्मनाक है।”

क्या कहा था तेजस्वी यादव ने?

राजद के राष्ट्रीय परिषद अधिवेशन में जब तेजस्वी से मतदाता सूची में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के लोगों के नाम जोड़ने की आशंका से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने सवाल को ही खारिज करते हुए कहा:

क्या निर्वाचन आयोग ने कोई प्रेस नोट जारी किया है? ये खबर कहां से आई? सूत्र बता रहे हैं ऐसा… ये वही सूत्र हैं जिन्होंने पाकिस्तान पर कब्जा करवा दिया था।
हम ऐसे ‘सूत्र’ को ‘मूत्र’ समझते हैं, जो दुर्गंध फैलाता है।

 विपक्षी हमले और विवाद का असर

भाजपा नेताओं का मानना है कि तेजस्वी की यह भाषा न केवल मीडिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है, बल्कि उनके राजनीतिक संस्कारों की भी पोल खोलती है। वहीं, राजद की तरफ से इस बयान पर कोई औपचारिक सफाई अब तक नहीं दी गई है।

 निष्कर्ष:
तेजस्वी यादव की “सूत्र-मूत्र” टिप्पणी ने उन्हें एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया है। जहां भाजपा उनके सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग कर रही है, वहीं यह विवाद बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को और गरमा सकता है।

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