Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में 2025 की दो प्रमुख फिल्में को कंट्रोवर्सी का सामना करना पड़ा।
ब्यूरो चीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में अच्छे से अच्छे फिल्मों का निर्माण किया जाता है प्रदर्शन किया जाता है मगर उन फिल्मों को कंट्रोवर्सी का सामना करना पड़ सकता है और पढ़ भी रहा है इसी कड़ी के अंतर्गत वर्ष की शुरुआत में सबसे अच्छी फिल्म प्रदर्शित हुई थी वह फिल्म निम्न है।
डोली लेके आजा।
इस फिल्म को भी कंट्रोवर्सी का सामना करना पड़ा और सिनेमा घर से हटा दिया गया इस फिल्म के निर्माता महेंद्र महेश्वर अरविंद कुर्रे के अंतर्गत बनी फिल्म को कंट्रोवर्सी कर दिया गया इस फिल्म के मुख्य कलाकार किशन सेन मंजिमा उर्वशी साहू एवं अन्य कलाकार थे जिनको कंट्रोवर्सी का सामना करना पड़ा और कंट्रोवर्सी के चलते फिल्म को सिनेमा घर से हटा दिया गया।
क्या फिल्मों को राजनीतिकरण कर दिया जाता है की जातिगत समीकरण में रख दिया जाता है इसे क्या एक अन्य समाज के द्वारा या व्यक्ति के द्वारा फिल्म का निर्माण किया जाता है और उसे प्रदर्शित किया जाता है तो उसे फिल्म के पीछे दुश्मनी लेना चालू कर देते हैं वहीं पर बड़े निर्माता की फिल्म प्रदर्शित होती है उसे कंट्रोवर्सी नहीं किया जाता क्या कारण है क्या इस फिल्म में छोटा कलाकार है जैसे किशन सेन मंजिमा यह दोनों छोटे जाति के हैं जिसके चलते फिल्म को कंट्रोवर्सी कर दिया गया जिसके चलते फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई क्योंकि जो भी फिल्म बनती है वह चलने योग्य रहती है मगर उसे चलने नहीं दिया जाता कंट्रोवर्सी करके उसे हटा दिया जाता है।

माया बिन रहे ना जाए। यह फिल्म वर्ष की 2025 की अप्रैल में 4 अप्रैल को प्रदर्शित हुई उसे भी कंट्रोवर्सी का सामना करना पड़ा इस फिल्म के मुख्य कलाकार किरण चौहान करण चौहान अंजली सिंह ठाकुर संगीता निषाद सुमित्रा साहू पुष्पेंद्र सिंह एवं अन्य कलाकारों से अदाकारी की गई है और इस फिल्म के निर्माता दीपक कुर्रे अन्य में संतोष कुर्रे राकेश कुर्रे के द्वारा निर्मित इस फिल्म को भी सिनेमा घर से नकार दिया गया अर्थात कंट्रोवर्सी कर दिया गया कहा गया कि भाई बहन की जोड़ी वाली फिल्म को हम नहीं देखेंगे भाई-बहन की जोड़ी की जो फिल्म है वह फिल्मों में रोमांस सीन है वह सीन है चुंबन सीन है कह कर कंट्रोवर्सी कर सिनेमा घर से हटा दिया गया और विवाद की घड़ी खड़ा कर दिया गया मगर यह फिल्म कितना भी विवादित थी मगर विवादित फिल्मों को फिल्म के निर्माता ने यूट्यूब चैनल पर लॉन्च करके दिखा दिया।
हमारा कहना यह है कि चाहे छोटा निर्माता हो चाहे बड़े निर्माता हो किसी भी जाति का किसी भी समाज का रहने वाला प्रोड्यूसर डायरेक्टर है फिल्म को अलग नजरिया से देखना चाहिए कलाकारी को देखना चाहिए और जो कलाकारी को नहीं देखा है उसकी ही कंट्रोवर्सी होनी चाहिए ना की फिल्मों को कंट्रोवर्सी में लाकर हटाने का कार्य किया जाए।
जिस तरह से इस फिल्म को कंट्रोवर्सी कर दिया गया वहीं यह यूट्यूब चैनल पर धूम मचा रही है और आज की स्थिति में मोबाइल के माध्यम से यूट्यूब चैनल पर लॉन्च होते ही फिल्म दो से तीन मिलियन तक के पहुंच गई है इसकी ग्राफ और मुंहतोड़ जवाब भी दे दिया।
अंततः यही कहा जा सकता है कि उपरोक्त दोनों फिल्मों को जातिगत समर्थन की वजह से भरपूर सहयोग मिला और मिल रहा है।
हमारा कहना यह है कि चाहे छोटा निर्माता हो चाहे बड़े निर्माता हो बनाने वाले के ऊपर नहीं जाना चाहिए की कलाकारी जो किया है वह निम्न जाति का किया है ईश्वर ध्यान नहीं देना चाहिए ध्यान इस और रहना चाहिए कि एक छोटे से गांव की रहने वाली मंजिमा की कलाकारी किस तरह से चार चांद लग रही है और किरण और कारण दोनों तो भाई-बहन है उसके बावजूद भी 300 एल्बम में काम करके दिखा दिया वहीं अन्य एल्बम भी निकलती है उसे रिस्पांस नहीं मिलता और रिस्पांस मिलता है तो वह एक 2 सेकंड के लिए मिलता है।
जब कंट्रोवर्सी को हटा दिया जाएगा तो हर फिल्म आगे बढ़ सकता है या हमारा मानना है।
क्योंकि छत्तीसगढ़ी फिल्मों में छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति एवं पर्यटन क्षेत्र को चित्रण कर दिखाया जा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि फिल्म सिटी को जातिगत आधार न मानते हुए सर्वजन हिताय का परिभाषा को चरितार्थ करना चाहिए।
हमारे संवाददाता कहते हैं कि साल की दो फिल्मों को कंट्रोवर्सी का जो सामना करना पड़ा मगर सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि डोली लेके आजा के द्वारा मुफ्त में अस्पताल खोलने की जो सपना है वह साकार होते नजर आ रहा है रायपुर के पास जमीन अधिग्रहण कर लिया गया है एक करोड़ में जमीन खरीदी की गई है उसमें तत्काल यथाशीघ्र आधारशिला रखी जाएगी और मुफ्त अस्पताल की योजना कटिबंध होकर फिल्म के लिए और चार चांद लगा देगी।
ब्यूरो रिपोर्ट राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा से।

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