
रिपोर्टर कपिल देव शर्मा सीकर राजस्थान
सीकर शहर में रेलवे क्रॉसिंग पर 22 साल बाद दूसरा पुलिया बनेगा। 2005 में पहला पुलिया नवलगढ़ रोड फाटक पर बनाया था। अब सीकर-झुंझुनूं बाइपास पर आरओबी बनाया जाएगा। यह शहर का पहला 680 मीटर लंबा फोरलेन ओवरब्रिज होगा। डिवाइडर सहित इसकी चौड़ाई 21 मीटर होगी। इस पर 80 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे। आरओबी का काम रेलवे जयपुर मंडल की गति शक्ति इकाई द्वारा किया जाएगा। इसकी डिजाइन आरएसआरडीसी ने बनाई थी। लेकिन बाद में इसे रेलवे द्वारा बनाए जाने पर सहमति बनी। इसमें 25 फीसदी केंद्र व 75 फीसदी पैसा राज्य सरकार वहन करेगी। रेलवे से ड्रॉइंग फाइनल होने के बाद टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। दो महीने में काम शुरू होने की संभावना है। निर्माण पूरा होने पर दो साल का समय लगेगा। आरओबी के नीचे जयपुर की तरफ सब-वे (अंडरपास) बनाया जाएगा। ताकि छोटे वाहन और पैदल राहगीर रेलवे ट्रैक पार कर सकें। भास्कर में पढ़िए शहर के पहले आरओबी का ड्राफ्ट और प्लान.
जानिए आरओबी से जुड़ी खास बातें, आमजन और वाहन चालकों को क्या होगा फायदा
रींगस सीकर खंड पर किमी 234 / 6-8 पर क्रॉसिंग – संख्या 189 पर फोर लेन आरओबी बनेगा। निर्माण कार्य रेलवे की गति शक्ति यूनिट करेगी। रोशनी व्यवस्था के लिए आरओबी के शुरुआत से आखिरी तक स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी। आरओबी रेलवे क्रॉसिंग के एक तरफ 335 व दूसरी तरफ 310 मीटर लंबा होगा। रेलवे लाइन के ठीक ऊपर 37 मीटर तक की लंबाई बगैर किसी स्लॉब के स्टेट रहेगी। पैदल यात्रियों के लिए पुलिया से चढ़ने- उतरने के लिए दो सीढ़िया बनेगी। क्रॉसिंग पर जयपुर की तरफ 2.5 मीटर ऊंचा व 5 मीटर चौड़ा अंडरपास बनाया जाएगा। ताकि छोटे वाहनों और पदयात्री ट्रैक क्रॉस कर सकें। इसके साथ ही 800 मीटर लंबाई में 3.5 मीटर चौड़ी सर्विस लेन बनाई जाएगी। आरओबी का बीच का हिस्सा पिलर पर रहेगा। आठ जगह पिलर बनाए जाएंगे। इसके नीचे की जगह में ग्रीन बेल्ट से सौंदर्यीकरण बढ़ाया जाएगा। यहां पार्किंग बनाई जाएगी। ताकि नजदीकी मार्केट को पार्किंग सुविधा मिल सके।
ड्राइंग फाइनल हो चुकी है: सीपीआरओ रेलवे
रींगस सीकर रेलवे क्रॉसिंग संख्या 189 पर फोर लेन आरओबी बनाया जाएगा। ड्राइंग फाइनल हो चुकी है। जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। – शशि किरण, सीपीआरओ, रेलवे
सीकर-झुंझुनूं बाइपास शहर का सबसे व्यस्त रूट, रोज गुजरते हैं 4 हजार वाहन
सीकर-झुंझुनूं बाइपास पर छोटे वाहनों के साथ सबसे ज्यादा भारी वाहनों का दबाव है। सीकर स्टेशन से हर दिन 30 से ज्यादा ट्रेनों का आवागमन होता है। ऐसे में रेलवे क्रॉसिंग 30 बार बंद होता है। फाटक बंद होने के दौरान यहां एक किमी तक वाहनों की कतार लग जाती है। हर दिन इस रास्ते से चार हजार वाहन गुजरते हैं। फाटक खुलने पर आधा घंटे जाम में फंसे रहते हैं वाहन। पिछले दिनों फाटक की चौड़ाई टू लेन से फोर लेन की गई थी। इधर, पिछले कुछ सालों में बाइपास के आसपास कई कॉलोनियां डवलप हुई हैं। इस कारण भी वाहनों का आवागमन काफी बढ़ गया है। इससे फाटक पर जाम की समस्या रहती है।

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