Chhattisgarh News : ऐतिहासिक मॉडमसिल्ली बांध का मत्स्य ठेका तत्काल निरस्त करें कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम जी, स्थानीय आदिवासियों, मछुआ को रोजगार दो

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
धमतरी जिले के ऐतिहासिक मॉडमसिल्ली (मुरमसिली) जलाशय के मत्स्य पालन ठेके को लेकर स्थानीय जनजाति, पारंपरिक मछुआरा समाज और किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ‘समस्त संघर्ष समिति मॉडमसिल्ली’ के बैनर तले स्थानीय ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ शासन के माननीय मत्स्य पालन कैबिनेट मंत्री श्री रामविचार नेताम जी से इस जनविरोधी व्यावसायिक ठेके को तत्काल निरस्त करने की पुरजोर मांग की है। संघर्ष समिति के प्रमुख /अध्यक्ष ने संयुक्त रूप से शासन को अवगत कराया है कि मॉडमसिल्ली बांध का निर्माण ब्रिटिश काल में वर्ष 1914 से प्रारंभ होकर 1923 में पूर्ण हुआ था। इस जलाशय के निर्माण में यहाँ के आदिवासी, किसान और मछुआरा समाज के पूर्वजों ने अपनी जमीनों का त्याग किया और खून-पसीना बहाया है। यह क्षेत्र पूर्णतः जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है, जहाँ सदियों से स्थानीय समाज जल, जंगल और जमीन के पारंपरिक अधिकारों के सहारे अपनी आजीविका चला रहा है। पूंजीपतियों को ठेका देने से भुखमरी की कगार पर स्थानीय समाज: समिति के सदस्यों ने रोष जताते हुए कहा कि आज स्थानीय मूल निवासियों के अधिकारों को दरकिनार कर, भारी-भरकम पैसों के दम पर बाहरी ठेकेदारों और पूंजीपतियों को इस बांध का मत्स्य ठेका सौंप दिया गया है। इस गलत निर्णय के कारण स्थानीय मछुआरों से उनका पारंपरिक रोज़गार छिन गया है और क्षेत्र के किसानों के निस्तारी व सिंचाई अधिकारों पर भी संकट मंडरा रहा है। यह स्थानीय समाज के पेट पर लात मारने जैसा है।

माननीय मंत्री श्री रामविचार नेताम जी से संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें: ठेका तत्काल निरस्त हो: मॉडमसिल्ली बांध का वर्तमान व्यावसायिक मत्स्य पालन ठेका बिना किसी देरी के तुरंत रद्द (निरस्त) किया जाए। स्थानीय समितियों को मिले अधिकार: इस जलाशय पर मत्स्य पालन का पहला और कानूनी अधिकार स्थानीय मछुआरा सहकारी समितियों और जनजातीय समाज को दिया जाए। किसानों के अधिकारों की रक्षा: बांध के पानी और तटीय क्षेत्रों पर स्थानीय किसानों के सिंचाई, मवेशियों के निस्तारी और पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित रखा जाए। स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता: शासन की नीतियों के तहत स्थानीय आदिवासियों और विस्थापितों को ही रोजगार में प्राथमिकता दी जाए। संघर्ष समिति ने माननीय कैबिनेट मंत्री जी से आग्रह किया है कि वे स्वयं एक संवेदनशील और जमीनी नेता हैं, इसलिए वे इस आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र की जायज मांगों पर तुरंत संज्ञान लें। यदि शासन द्वारा इस ठेके को निरस्त कर स्थानीय मछुआरों और किसानों को उनका हक नहीं दिया गया, तो समस्त क्षेत्रवासी अपनी आजीविका और अस्तित्व को बचाने के लिए सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन और जल-सत्याग्रह करने के लिए बाध्य होंगे।



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