
रिपोर्टर कपिल देव शर्मा सीकर राजस्थान
नीमकाथाना सांवलपुरा तंवरान में स्थित अविनाशी धाम पर गुरुवार को वार्षिक ध्वजाबंद महाराज का मेला भरा। इसमें एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कबूतरों को दाना डालकर मन्नत मांगी। मेले में भक्तों ने करीब 30 क्विंटल अनाज चढ़ाया। टोडा रोड पर स्थित प्राचीन और प्रसिद्ध पवित्र स्थल अविनाशी धाम पर ध्वजाबंद महाराज का मेला भरा। मेले में दूर-दूर से पदयात्रा कर आए श्रद्धालुओं ने सफेद रंग के निशान चढ़ाए। यह निशान भक्त मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते है। मेले में ड्रोन से निगरानी व पुष्प वर्षा की गई। महिलाओं व बच्चों ने जमकर मेले में खरीददारी की। गुर्जर समाज के लोगों ने नहड़ी व धमाल कार्यक्रम का आयोजन किया। ध्वजाबंद महाराज की पहाड़ी पर बड़ी तादाद में कबूतर रहते हैं। उन्हें हर दिन 50 किलो अनाज डाला जाता है। मेले में दूरदराज के श्रद्धालु आते हैं। यहां श्राद्ध पक्ष में गुर्जर समाज के लोग धोक लगाने आते हैं। मेले के दौरान बड़ी संख्या में भक्तो ने निशान पद यात्रा निकाली निशान पदयात्रा दूर दराज से भक्त अविनाशी धाम पहुँचे। ड्रोन कैमरे से हुई निगरानी इस बार मेले में सुरक्षा के लिए कमेटी ने ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई। मेला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि असामाजिक तत्वों, जेबकतरों व चेन स्नेचर को पकड़ने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया। ड्रोन 400 फीट की ऊंचाई पर था।
पहाड़ी की होती है पूजा
यहां कोई मूर्ति स्थित नहीं है। यहां सिर्फ पहाड़ी की पूजा होती है। आने वाले श्रद्धालु पहाड़ी की परिक्रमा पूरी कर बाबा ध्वजाबंद महाराज के दर्शन करते हैं। यह पहाड़ी भगवान विष्णु के रूप में पूजी जाती हैं। कबूतरों को डालते हैं दाना यहां एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कबूतरों को दाना डालकर मन्नत मांगी। यहां प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता। मेले में भक्तों ने करीब 30 क्विंटल से ज्यादा अनाज चढ़ाया। ध्वजाबंद महाराज की पहाड़ी पर बड़ी तादाद में कबूतर रहते हैं। उन्हें हर दिन 50 किलो अनाज डाला जाता है।
आस पास में शराब पर पाबंदी
अविनाशी धाम के आसपास तीन चार किलोमीटर के दायरे में शराब नहीं बिकती है। ना ही कोई शराब पीकर धाम पर आता है। अविनाशी धाम के चारों और वन क्षेत्र है। जिसके चलते चारो और हरियाली ही हरियाली विद्यमान है। भक्त प्रकृति के आगोश में आ कर सुकून महसूस करते है। यह हैं धाम की मान्यता इस धाम की ऐसी मान्यता है कि यदि कोई अंधाआदमी बाबा के धाम पर आंखों की रोशनी की मन्नत मांगता है तो उसकी आंखों की रोशनी वापस आ जाती है। वापस आने पर भक्त बाबा के चांदी कीआंख चढ़ाकर जाते हैं।

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