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Uttarakhand News मेहंदीपुर बालाजी जाने से पहले इन रहस्यों को जान लें, ताकि बाद में ना हो परेशानी

रिपोर्टर नारायण सिंह पिथौरागढ़ उत्तराखंड

21वीं सदी में भारत में आज भी कई ऐसे मंदिर हैं, जो रहस्यों से भरे हुए हैं। हर मंदिर की अपनी एक गाथा और महत्व है। इन्हीं मंदिरों में से एक है मेहंदीपुर बालाजी। राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाडियों के बीच मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर बसा हुआ है। यहां आपको कई विचित्र नजारे देखने को मिल जाएंगे, जिनहें पहली बार देखकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं और डर भी जाते हैं। विज्ञान भूत-प्रेतों को नहीं मानता है लेकिन यहां हर दिन दूर-दराज से ऊपरी चक्कर और प्रेत बाधा से परेशान लोग मुक्ति के लिए आते हैं।

2 बजे लगता है दरबार

भूत प्रेतादि ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए यहां आने वालों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में प्रेतराज सरकार और भैरवबाबा यानी की कोतवाल कप्तान की मूर्ति है। हर दिन 2 बजे प्रेतराज सरकार के दरबार में पेशी यानी की कीर्तन होता है, जिसमें लोगों पर आए ऊपरी सायों को दूर किया जाता है।

नहीं ले जा सकते घर

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के किसी भी तरह के प्रसाद को आप खा नहीं सकते और ना ही किसी को दे सकते हैं। यहां के प्रसाद को आप घर पर भी नहीं लेकर जा सकते। यहां तक की कोई भी खाने-पीने की चीज और सुंगधित चीज आप यहां से घर नहीं लेकर जा सकते। बताया जाता है ऐसा करने पर ऊपरी साया आपके ऊपर आ जाती है।

बायीं छाती में है छेद

मेहंदीपुर बालाजी की बायीं छाती में एक छोटा सा छेद है जिससे लगातार जल बहता रहता है। कहते हैं यह बालाजी का पसीना है। यहां बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरों को उड़द का प्रसाद चढ़ता है। बताया जाता है कि जिनके अंदर भूत-प्रेत आदि शक्तियां होती हैं, वह यह प्रसाद खाते ही अजब-गजब हरकतें करने लगते हैं।
भक्त करते हैं यह नियम पालनमेहंदीपुर बालाजी की मूर्ती के ठीक सामने भगवान राम-सीता की मूर्ती है, जिसके वह हमेशा दर्शन करते रहते हैं। यहां हनुमानजी बाल रूप में मौजूद है। यहां आने वाले सभी यात्रियों के लिए नियम है कि उन्हें कम से कम एक सप्ताह तक लहसुन, प्याज, अण्डा, मांस, शराब का सेवन बंद कर देना चाह‌िए।

2 कैटेगरी का होता है प्रसाद

मेहंदीपुर बालाजी में बाकी मंदिरों से अलग प्रसाद चढ़ता है। यहां प्रसाद की 2 कैटेगरी है, एक दर्खावस्त और दूसरी अर्जी। दर्खावस्त को बालाजी में हाजरी भी बोलते हैं। हाजरी के प्रसाद को दो बार खरीदना पड़ता है और अर्जी में 3 थालियों में प्रसाद मिलता है। मंदिर में दर्खावस्त एकबार लगाने के बाद, वहां से तुरंत निकल जाना होता है। अर्जी का प्रसाद लौटते समय लेते हैं जिन्हें अपने पीछे फेंकना होता है। नियम है कि प्रसाद फेंकते समय पीछे नहीं देखना चाहिए।

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