Chhattisgarh News कोरबा: प्रशांत झा के नेतृत्व में सड़क चौड़ीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरे विस्थापित, बेदखली आदेश के विरोध में तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा के बरमपुर (आजाद नगर) में 46 वर्षों से रह रहे विस्थापितों को सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पुनः बेदखल करने के आदेश के खिलाफ छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने मोर्चा खोल दिया है। प्रशांत झा के मुख्य नेतृत्व में आक्रोशित विस्थापित परिवारों ने दर्री तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन और एसईसीएल को साफ चेतावनी दी है कि बिना पुनर्वास के किसी को भी उजाड़ने नहीं दिया जाएगा। प्रशांत झा का आरोप: “एसईसीएल और प्रशासन का अमानवीय चेहरा आया सामने” इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने जिला प्रशासन और एसईसीएल के इस कदम पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
जरहाजेल से विस्थापित इन परिवारों को 1980 में एसईसीएल द्वारा जमीन अधिग्रहण के बाद यहाँ बसाया गया था। अब 46 साल बाद बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इन्हें दोबारा उजाड़ने का आदेश देना बेहद अमानवीय है। किसान सभा इस तानाशाही का पुरजोर विरोध करती है और प्रभावितों के अधिकारों के लिए आखिरी दम तक लड़ेगी।” मुख्य नेतृत्वकर्ता प्रशांत झा ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मांग की है कि बेदखली के इस आदेश पर तत्काल रोक लगाई जाए।
किसी भी परिवार को हटाने से पहले उनके लिए स्थाई बसावट (पुनर्वास) का पक्का इंतजाम किया जाए।
विस्थापितों के वर्तमान में बने हुए मकानों का उचित मुआवजा दिया जाए।रोजगार मिला न न्याय, अब छत भी छीनी जा रही” – पीड़ित किसान प्रशांत झा के नेतृत्व में एकजुट हुए जरहाजेल के विस्थापित किसान इंद्रप्रकाश कैवर्त और घासीराम कैवर्त ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वर्ष 1980 में देश के विकास के नाम पर उन्होंने अपने पूर्वजों की जमीन दे दी थी। आज भी कई विस्थापित रोजगार और सही बसावट से वंचित हैं, और अब 46 साल बाद उन्हें फिर से बेघर करने की कोशिश की जा रही है।

जबरन हटाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी प्रशांत झा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने बिना किसी ठोस पुनर्वास नीति के विस्थापितों को जबरन हटाने का प्रयास किया, तो किसान सभा उग्र रूप से सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी। इस अवसर पर प्रशांत झा के साथ मुख्य रूप से रेशम लाल यादव, दामोदर श्याम, घासीराम, इंद्रप्रकाश, शिवप्रसाद, अनूप कुमार, राजू कैवर्त, सुशील कुमार, गौतम यादव समेत बड़ी संख्या में प्रभावित किसान और ग्रामीण उपस्थित थे।




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