
रिपोर्टर राजू अंसारी कतरास झारखंड
बस्ताकोला कोलडंप मे डीओ ट्रक लोडिंग शुरू करने के लिए प्रबंधन ने तैयारी कर ली है।पांच हजार टन कोयले का बिडिंग के बाद अलाटमेंट भी प्रबंधन ने शुरू कर दिया है।वहीं भाजपा नेत्री रागिनी सिंह ने प्रबंधन से जमसं को बड़ी युनियन बताते हुए उनके मजदूरों को पचास प्रतिशत हिस्सेदारी देने की मांग की है।नहीं मिलने पर डीओ ट्रक लोडिंग चालू नहीं होने देने का एलान की है।इस मांग पर स्थानीय असंगठित मजदूरों को रोजगार देने की मांग पर जमसं ने सोमवार को बस्ताकोला कोल डंप पर जोरदार प्रदर्शन किया।नेतृत्व कर रहे पप्पू पासवान ने कहा कि यहां ट्रक लोडिंग के लिए प्रबंधन ने तैयारी की है।पर जमसं को दर किनार कर यह फैसला लिया गया है।लेकिन जबतक जमसं से जुड़े स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं मिला तो ट्रक लोडिंग शुरू नहीं होने दिया जाएगा।प्रदर्शन के बाद जमसं ने बस्ताकोला कोलियरी पीओ एके शर्मा को एक मांग पत्र सौंपा है।जिसमे मैनुअल ट्रक लोडिंग मे जमसं के पचास प्रतिशत स्थानीय को रोजगार मिले,आउटसोर्सिंग मे कार्यरत मजदूरों को एचपीसी के तहत वेतन देने, यहां से चल रहे ट्रांसपोर्टिंग मे जमसं युनियन के मजदूर को रोजगार देने व ओबी डंप और ट्रांसपोर्टिंग मार्ग मे पानी छिड़काव करने की मांग शामिल है।प्रदर्शन के पूर्व असंगठित मजदूरों ने चांदमारी बालू बंकर से एक.विशाल जुलूस निकाला गया।यह जुलूस कोल डंप पर जाकर सभा मे बदल गई।प्रदर्शन मे पप्पू पासवान, बुधन मंडल,संजय यादव जितू पासवान, नारायण पासवान,सेलो पासवान, उपेंद्र सिंह,विशाल सिंह,मो. सुल्तान सहित अन्य थे।
मजदूरों की कमाई को हड़पना चाहते है कुछ दलाल
भाजपा नेत्री रागिनी सिंह ने कहा कि बस्ताकोला कोलडंप मे ट्रक लोडिंग शुरू होने के शोर से ही दलाल सक्रिय हो गए है।कुछ दलाल किस्म के लोग अन्य युनियन का चोला पहनकर मजदूरों की कमाई हड़पना चाहते है।अपनी जेब भरने मे लगे हुए है।ऐसा जमसं कभी नहीं होने देगा।हमारी युनियन की मजबूत संगठन है।बावजूद इसके दरकिनार किया गया।कहा कि अगर उनके मजदूरों को पचास प्रतिशत रोजगार नहीं मिला तो किसी किमत पर काम चालू नहीं होने देगें।
डीओ ट्रक लोडिंग कार्य मे फिर लग सकता है ग्रहण
बस्ताकोला आउटसोर्सिंग शुरू होते ही प्रबंधन ने डीओ लोडिंग कार्य शुरू कराना चाहा।कई बार कोयला का एलाटमेंट भी हुई।पर युनियन के बीच विवाद के कारण यहां ट्रक लोडिंग कार्य शुरू नहीं हो सका।इस बार भी युनियन के बीच अपने मजदूरों को ज्यादा हिस्सेदारी के कारण एक बार फिर ग्रहण लग सकता है।
सभी युनियन के बीच बनी थी सहमति

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