Jammu & Kashmir News शस्त्र लाइसेंस घोटाला: सरकारी वकीलों की अनुपस्थिति से कोर्ट नाराज

स्टेट चीफ मुश्ताक पुलवामा जम्मू/कश्मीर
जम्मू, 15 मार्च : हथियार लाइसेंस घोटाले में सरकार की ओर से प्रतिनिधित्व न होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी और नाराजगी जताई है।
हथियार लाइसेंस मामले की सुनवाई करते हुए, मुख्य न्यायाधीश एन. कोटिस्वर सिंह और न्यायमूर्ति एम.ए. चौधरी की खंडपीठ ने जेके सरकार और भारत संघ के गैर-प्रतिनिधित्व पर गहरी नाराजगी और नाराजगी व्यक्त की क्योंकि उनके वकील उपस्थित नहीं थे।
अदालत ने कहा, “जब मामला उठाया गया तो न तो यूटी सरकार का प्रतिनिधित्व किसी वकील ने किया और न ही भारत संघ की ओर से कोई प्रतिनिधित्व किया, जिसके कारण यह अदालत कोई आदेश पारित करने में असमर्थ है।”
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील राहुल रैना ने कहा कि प्रशासन कथित तौर पर हथियार लाइसेंस घोटाले में शामिल आईएएस अधिकारियों को बचा रहा है और पिछले दो वर्षों से जानबूझकर अभियोजन स्वीकृति फाइलों को दबाकर बैठा है और दागी नौकरशाहों को प्रमुख पदों पर भी तैनात किया है, जबकि अभियोजन पक्ष जेकेएएस अधिकारियों के खिलाफ वर्ष 2021 में ही मंजूरी दे दी गई थी और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सीबीआई विशेष अदालतों में कई चालान दायर किए गए हैं।
वकील राहुल रैना ने आगे कहा कि दो कानून नहीं हो सकते, एक आम आदमी के लिए और दूसरा आईएएस अधिकारियों के लिए।
डिवीजन बेंच ने पाया कि सरकार की ओर से किसी वकील की अनुपस्थिति में वह कोई भी आदेश पारित करने में असमर्थ है। डिवीजन बेंच ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस आदेश की एक प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए भारत संघ के संबंधित मंत्रालयों और यूटी प्रशासन को भी भेजी जाए।
मामले के महत्व को देखते हुए डिवीजन बेंच ने रजिस्ट्री को 23 अप्रैल 2024 के लिए मामले को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि इस घोटाले के तहत यह आरोप लगाया गया है कि 2012 और 2016 के बीच जम्मू-कश्मीर में गैर-हकदार व्यक्तियों को 2.78 लाख से अधिक हथियार लाइसेंस जारी किए गए थे और यह सब कुछ शीर्ष आईएएस अधिकारियों के तहत हुआ था।

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