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Uttar Pradesh News राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती मनाई गई

रिपोर्टर कमलेश कुमार शुक्ला कानपुर उत्तर प्रदेश

कानपुर संबाद दाता लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती मनाई गई 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों ने भारत को स्वाधीन तो कर दिया पर जाते हुए वे ग्रह युद्ध एवं अव्यवस्था के बीज बो गए उन्होंने भारत के 600 से भी अधिक रजवाड़े को भारत में मिलने या न मिलने की स्वतंत्रता दे दी अधिकांश रजवाड़े तों भारत में स्वेच्छा से मिल गए पर कुछ आंख दिखाने लगे ऐसे में लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उनका दिमाग सीधा कर उन्हें भारत में मिलाया उन्हें हम लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल जी के नाम से जानते हैं पटेल जी का जन्म 31 अक्टूबर 1875को हुआ था इनके पिता श्री झबेरभाई पटेल गांव करमसद गुजरात प्रान्त के निवासी थे उन्होंने भी 1857 में रानी लक्ष्मीबाई झांसी के पक्ष में युद्ध किया था इनकी माता लाडोबाई थी बचपन से ही ये बहुत साहसी एवं जिद्दी थे एकबार विद्यालय से आते समय ये पीछे छूट गए कुछ साथियों ने जाकर देखा तो ये धरती में गड़े एक नुकीले पत्थर को उखाड़ रहे थे पूछने पर बोलें इसने मुझे चोट पहुंचाई है अब इसे मैं उखाड़ कर मानूंगा और काम पूरा कर ही घर आए एक बार इनके शरीर पर फोड़ा हो गया उस समय गांवों में सलाख को आग में गरम कर फोड़े को दागा जाता था मगर बल्लभ भाई जैसे छोटे बालक को किसी की हिम्मत नहीं पड़ी सलाख दागने की पटेल जी ने सलाख को हाथ में लेकर फोड़े को दाग दिया पटेल जी ने मुंह से उफ तक नहीं निकालीं बड़े भाई विट्ठल भाई ने और फिर बल्लभ भाई ने इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर की परीक्षा पास की पटेल जी की 1926 मे गांधी जी से भेंट हुई और फिर स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े बैरिस्टर वाली वेशभूषा त्याग दी बारडोली के किसान आंदोलन का सफल नेतृत्व करने के कारण गांधी जी ने इन्हें सरदार कहां फिर तों उपाधि इनके नाम से जुड़ गईं निर्भीक वक्ता थे वे कई बार जेल गए 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में उन्हें तीन वर्ष कीई सजा हुई स्वतंत्रता के बाद उन्हें उप प्रधानमंत्री तथा ग्रह मंत्री बनाया गया !

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