छत्तीसगढ़राज्य

Chhattisgarh News कांकेर किन्नर विमर्श-मिथ एवं यथार्थ विषय पर व्याख्यान

व्याख्यान सीरीज़ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम के निर्देशन,

✍️ रिपोर्टर डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव कांकेर छत्तीसगढ़

भानुप्रतापदेव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कांकेर द्वारा आयोजित इरूडाइट लेक्चर सीरीज के तृतीय दिवस पर समाजशास्त्र विभाग के द्वारा किन्नर विमर्श मिथ एवं यथार्थ विषय पर व्याख्यान मोहम्मद सैयद अली, शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जगदलपुर के द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह व्याख्यान सीरीज़ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम के निर्देशन, कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अर्चना सिंह, प्रो. पी. एस. गौर के अथक प्रयासों से संचालित किया गया।

डॉ. बसंत नाग ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि हम किन्नरों को केवल घर-घर जाकर मांगने विभिन्न समारोह एवं संस्कारों के अवसर पर केवल नृत्य, गीत प्रस्तुत करने वालों के रूप में ही जानते हैं लेकिन उनके बारे में उतनी गहराई से जान नही पाते, कि वह समाज के महत्वपूर्ण अंग है। प्रमुख वक्ता डॉ. व्ही. के. रामटेके ने परिचय देते हुये ने बताया कि अली सर न केवल उसके गुरू रहे है बल्कि एक मार्गदर्शक, सरल, कुशल प्राध्यापक के रूप में विद्यार्थियों के जीवन में अमिट छाप छोडे हैं, उनकी सैकड़ों शोध, पेपर अनेक किताबे प्रकाशित है। पहली बार व्याख्यान में अली सर इस महाविद्यालय में शिरकत किये है। यह अत्यंत गौरव की बात है। प्रमुख वक्ता मो. सैयद अली ने अपने व्याख्यान में पुरुष किन्नरों के संदर्भ में बतलाये उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गम्भीर सामजिक और महत्वपूर्ण विषय है इनका उल्लेख सभी धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। इतिहास इस बात को साक्षी है पूर्व में किन्नरों के द्वारा राजतंत्र की सत्ता को बदलने हार को जीत में परितर्वन करने की क्षमता रखते है। प्राचीन काल में किन्नर खरीदे और बेचे जाते रहे है। शिखड्डी और जायसी का उदाहरण के साथ विदेशी किन्नरों का भी उल्लेख किया गया। किन्नर बच्चे जब पैदा होते है तो उसे निष्कासित करने, सम्पति से बेदखल करने, किन्नर समुदाय को सौप देते है यह मानसिकता पितृसत्तात्मक समाज की देन है।

अनुत्पादक से उत्पादक जैसी अवधारणा इस समाज में हमेशा अपमान जनक शब्दों का प्रयोग किन्नरों के लिये प्रयोग किया जाता रहा है। समाज की घृणित और ओछी मानसिकता इस बात का घोतक है। प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम अपने उद्बोधन में किन्नरों जैसे विषय वस्तु पर व्याख्यान देते युगों से हो रही शोषण को मद्देनजर रखते हुए किन्नर संवेदना, प्रताड़ना और किन्नरों की समाज में भूमिका पर विचार व्यक्त किये। आभार प्रदर्शन पुनित राम उयके द्वारा किया गया । इस अवसर पर प्रो. एन. आर. साव, प्रो. शरद ठाकुर, डॉ. एस. आर. बंजारे, डॉ. एल.आर. सिन्हा, डॉ. लक्ष्मी लेकाम, सुश्री आर. कुलदीप, प्रो. सुमिता पाण्डे, प्रो. विजय प्रकाश साहू डॉ. सीमा परिहार, डॉ. पूनम साहू तथा महाविद्यालय के समस्त अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थिति रहे।

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