धनबाद के भू-धंसान पर केंद्र का दरवाजा खटखटाया, रागिनी सिंह ने कोयला मंत्री से मांगी उच्चस्तरीय जांच

👉झरिया में भू-धंसान और हेवी ब्लास्टिंग पर गरमाया मामला, रागिनी सिंह ने जी. किशन रेड्डी के सामने रखी जनता की चिंता
👉अवैध खनन से लेकर पुनर्वास तक, झरिया विधायक ने केंद्रीय कोयला मंत्री के सामने उठाए धनबाद के ज्वलंत मुद्दे
👉भू-धंसान से दहशत में खनन क्षेत्र, रागिनी सिंह की मांग—धनबाद में भेजी जाए केंद्रीय जांच टीम
धनबाद। झरिया समेत धनबाद के कोयलांचल में लगातार सामने आ रही भू-धंसान की घटनाओं ने अब दिल्ली तक दस्तक दे दी है। झरिया विधायक रागिनी सिंह ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात कर धनबाद के खनन क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने भू-धंसान, कथित अवैध एवं अनधिकृत खनन, हेवी ब्लास्टिंग, पुनर्वास तथा रैयतों के मुआवजे जैसे मुद्दों पर गंभीरता से जांच कराने की मांग रखी।
विधायक ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष कहा कि झरिया सहित जिले के कई खनन क्षेत्रों में जमीन धंसने, मकानों में दरार आने और लोगों के असुरक्षित परिस्थितियों में रहने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल घटनाओं के बाद राहत या निरीक्षण तक सीमित रहने के बजाय इनके मूल कारणों की तकनीकी जांच जरूरी है।
उन्होंने विशेष रूप से उन इलाकों की जांच कराने की मांग की, जहां स्थानीय लोगों द्वारा नियमों के विपरीत अथवा अनधिकृत खनन किए जाने की शिकायतें की जा रही हैं। विधायक के मुताबिक, यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कहीं खनन गतिविधियों में नियमों की अनदेखी तो नहीं हो रही और उसका भूगर्भीय स्थिरता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ रहा।
👉हेवी ब्लास्टिंग पर भी उठे सवाल
रागिनी सिंह ने झरिया के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली हेवी ब्लास्टिंग का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा ब्लास्टिंग के दौरान तेज कंपन और उसके बाद मकानों में दरार आने की शिकायतें की जाती रही हैं।
उन्होंने ब्लास्टिंग के निर्धारित मानकों, विस्फोटकों के इस्तेमाल, सुरक्षा नियमों और निगरानी तंत्र की समीक्षा कराने का आग्रह किया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है या नहीं।
👉प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग
भू-धंसान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी विधायक ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के मकान असुरक्षित हो चुके हैं, उन्हें जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने और पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की। साथ ही खनन गतिविधियों से प्रभावित रैयतों की जमीन, मकान और आजीविका से जुड़े मामलों की नियमानुसार समीक्षा कर उचित मुआवजा दिलाने पर भी जोर दिया।
👉‘घटना को महज हादसा मानकर नहीं छोड़ा जा सकता’
विधायक ने हाल की भू-धंसान की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को महज स्थानीय हादसा मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने भू-धंसान के पीछे के कारणों का वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ स्तर पर अध्ययन कराने की आवश्यकता बताई।
उनका कहना था कि खनन गतिविधियों, भूमिगत परिस्थितियों, संभावित अनधिकृत खनन, ब्लास्टिंग और सुरक्षा व्यवस्था के बीच यदि कोई संबंध है, तो उसे जांच के जरिए सामने लाया जाना चाहिए।
👉धनबाद भेजी जाएगी मंत्रालय की टीम
रागिनी सिंह के अनुसार, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया है। विधायक ने बताया कि मंत्री ने मंत्रालय की टीम को जल्द धनबाद भेजकर खनन क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।
रागिनी सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या कंपनी पर एकतरफा आरोप लगाना नहीं है। उनकी प्राथमिकता खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, संभावित खतरों की समय रहते पहचान, प्रभावित परिवारों का सुरक्षित पुनर्वास तथा रैयतों को उनके अधिकार के अनुरूप मुआवजा दिलाना है।
उन्होंने कहा कि कोयला उत्पादन जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी उन लोगों की सुरक्षा है, जिनकी जमीन और घर खनन क्षेत्रों के बीच बसे हुए हैं। खनन के साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जनहित के मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।


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