Madhya Pradesh News 15 अगस्त के अवसर पर झालरा विद्यालय में शुरू करी नई परिपाटी और मनाया स्वतंत्रता दिवस।

रिपोर्टर डॉ रघुवीर सिंह राजपूत उज्जैन मध्य प्रदेश
शासकीय विद्यालय झलरा में बनाई नई परिपाटी दान में पंखे, पर्दे ,कॉपी ,बल्ब ग्रामीणों ने किया भेंट शासकीय माध्यमिक विद्यालय जलारा में 77 वा गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ में मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व संकुल प्राचार्य , प्रकाश चंद्र शर्मा सेवानिवृत्ति श्री बंसीलाल जी शर्मा सेवानिवृत्ति एवं श्री शिवनारायण जी शर्मा के मुख्य अतिथि में एवं ग्राम पंचायत जलारा के सरपंच श्रीमती ललिता बाई धमानिया की अध्यक्षता में विशेष अतिथि के रूप में श्री नागु सिंह जी पटेल , भैरू सिंह जी चौहान, विशेष आतिथ्य में कार्यक्रम संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में श्री अनूप सिंह जी राठौड़ भारतीय जनता पार्टी किसान युवा मोर्च माकड़ोन मंडल के अध्यक्ष । अध्यक्ष का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ सर्वप्रथम मुख्य अतिथियों के द्वारा मां शारदे का दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गांव के महेंद्र सिंह तोमर बालू सिंह उपसरपंच ,विजेंद्र सिंह जी तोमर ,रामेश्वर जी चौधरी के द्वारा मुख्य अतिथियों का पुष्प आहार एवं तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
बच्चों की परेशानियों को दूर करने के लिए गांव की एक नई पहल के तहत सेवानिवृत्त शिक्षक प्रकाश चंद जी शर्मा के द्वारा 21 सो रुपए नगद श्री महेंद्र सिंह तोमर , बालू सिंह जी उपसरपंच श्री विजेंद्र सिंह तोमर श्री गोविंद सिंह तोमर श्री नागु लाल जी दमानिया सरपंच प्रतिनिधि ,लाखन सिंह जी रोजगार सहायक के द्वारा विद्यालय को 6 पंखे दान में दिए गए । कैलाश दास बैरागी के द्वारा विद्यालय में खिड़की और दरवाजे में पर्दे लगाने के लिए सप्रेम भेंट किए गए ।बंसी लाल जी शर्मा सेवानिवृत्त शिक्षक के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को कॉपी और पेन भेंट किए गए , बद्रीलाल जी मालवीय के द्वारा विद्यालय में बड़े एलईडी बल्ब एवं तार दान दिए गए इस अवसर पर गांव के प्रमुख कमल सिंह जी फोटोग्राफर कमल दास जी बैरागी डॉक्टर साहब श्री नारायण सिंह जी विक्रम सिंह जी गटू बना , बाबू सिंह तोमर बने सिंह जी चावड़ा रामप्रसाद जी धर्मेंद्र जी बैरागी विद्यालय के अतिथि शिक्षक मनीष सिंह चुंडावत गौरी शंकर बोराणा एवं गांव के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अंबाराम मालवीय माध्यमिक शिक्षक एवं आभार बद्रीलाल जी मालवीय के द्वारा माना गया।

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