Rajasthan News आओ पढ़ते हैं पुस्तक “जीने की राह” और “ज्ञान गंगा” पवित्र धर्म पर आधारित पुस्तकें

रिपोर्टर मीना देवी हेमसिंह, ब्यावर सिटी अजमेर राजस्थान।
ब्यावर सिटी व आस पास के इलाकों में परमात्मा की शास्त्र प्रमाणित धार्मिक पुस्तकों को किया वितरण यह परमात्मा की ही दया है कि भारत की धरती पर ऋषि, मुनि, गुरु, संत, अवतार और महापुरूषों का जन्म होता रहा है। इनमें से कई बड़े समाज सुधारक रहे, तो कईयों ने यहां व्याप्त पाखंड़ का कड़ा विरोध कर नया इतिहास रचा। इन्हीं महापुरुषों में एक नाम स्वयं परमेश्वर कबीर साहेब जी का भी है जिन्होंने समाज सुधार और लोगों का परोपकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। परमेश्वर पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब के अवतार जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज आज विश्व कल्याण के लिए रात दिन प्रयत्न करते हुए समाज को नई दिशा दिखा रहे हैं समाज सुधार के लिए अध्यात्मिक पुस्तकें हर गांव हर शहर हर गली में भिजवा रहे हैं ताकि इन पुस्तकों को पढ़कर श्रद्धालु परमात्मा को पहचान सके । संत रामपाल जी महाराज ने बताया कबीर साहेब जी सशरीर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए और बचपन से ही समाज में व्याप्त पाखंडवाद, आडंबरों और कुरीतियों का पूरे ज़ोर से विरोध किया। जिसके कारण उस समय के हिंदू और मुस्लिम धर्म के ठेकेदार उनके दुश्मन बन गए और उन्होंने परमेश्वर कबीर जी को सैकड़ों यातनाएं भी दीं। लेकिन कबीर साहेब जी ने दोनों धर्मों में फैले पाखंड व आडंबरों का खुलकर विरोध किया। साथ ही उन्होंने जातिवाद, धार्मिक भेदभाव, ऊंच-नीच पर भी करारा प्रहार करते हुए प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। अपने परोपकार और समाज सुधार के कार्यों के कारण ही उन्हें आज भी एक सबसे बड़े समाज सुधारक और विचारक के रूप में जाना जाता है। लेकिन वास्तविकता तो यह है कि कबीर साहेब जी स्वयं ही पूर्णब्रह्म परमात्मा थे और हैं। जो संत रामपाल जी महाराज जी ने इन पुस्तकों में प्रमाण सहित विधि पूर्वक लिखकर समाज के आगे पेश करी है सेवा करते हुए नजर आए भगत गोपाल दास फौजी ब्यावर ललित दास झालावाड़ से किशन दास, कमल दास, सुरेश दास, देवी दास, सरवण दास, पिंटू दास, बाबू दास, महादेव दास, प्रवीण दास, प्रकाश दास, भगत बहन कविता दासी, नैना दासी, जनता दासी, कंचन दासी, रुकमा दासी, चुन्नी दासी, लक्ष्मी दासी, अनुरूपा दासी, सुशीला दासी आदि मौजूद रहे।




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