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Uttar Pradesh News क्षेत्र के गांव छजुपुरा सादात में सवेरे से मजलिसों का सिलसिला शुरू हुआ जो देर शाम जुलूस की शक्ल में कर्बला पहुंचा जहां पर नम आखों से ताजिये दफ़्न किये गए

रिपोर्टर नवरोज़ हैदर बिजनौर उत्तर प्रदेश

मजलिसों को क्रमशः ज़ाकिर मौहम्मद रज़ा व मौलाना नदीम अब्बास ने सम्बोधित किया । शनिवार को यौमे आशूरा के अवसर पर छजुपुरा सादात स्थित इमामबारगाह में मौलाना नदीम अब्बास ने मजलिस को सम्बोधित करते हुए कहा कि सन 61 हिजरी में यजीद नामक शासक था जो खुद को इस्लाम का खलीफा कहलाता था और चाहता था कि इमाम हुसैन उसकी बैअत करें मगर इमाम ने उसकी बैअत से इनकार कर दिया। जिस कारण झाम को अपना वतन मदीना छोड़कर करबला जाना पड़ा जहां पर यजीद की फौज ने इमाम हुसैन को 3 दिन का भूखा प्यासा रख कर शहीद कर दिया।
इमाम हुसैन ने अपनी और अपने 71 साथियों की कुर्बानी करबला में देदी मगर जालिम के आगे सर नहीं झुकाया । और इस्लाम व इंसानियत को हमेशा हमेशा के लिए बचा लिया। मजलिसों में सोजखानी मौहम्मद रजा, नायाब हैदर, मौहम्मद अब्बास, शमशाद हुसैन, सफदर अली, शावेज़ जैदी, आलम जैदी, सालिम जैदी ने पेश खानी शमशाद हुसैन, रईस जैदी ने तथा नोहे खानी फिरोज मैहदी, सालिम जैदी, शमशाद हुसैन, रियाजुल हसन, सादिक रजा, सफ़दर अली, अजमी जैदी ने की मजलिस के बाद जुलूस बरामद हुआ जिसमें जुल्जनाह, अलम, ताजिये, रोशन चौकी ताबूत आदि शामिल थे। जुलूस में सैकड़ों युवाओं ने छुरियों व जंजीरों से मातम किया जुलूस देर शाम अम्हेड़ा स्थित अम्बेडकर चौक होते हुए करबला पहुंचा जहां पर नम आंखों से ताज़िये दफ़्न किये गए कार्यक्रम का संचालन मीडिया प्रभारी शाही वास्ती ने किया। कार्यक्रम में पुलिस प्रशासन का पूर्ण सहयोग रहा।

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