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Madhya Pradesh News छतरपुर प्रधानमंत्री के स्वच्छता मिशन को असफल बना रहे बिजावर विकासखंड के सचिव और सरपंच

एक तरफ तो स्वच्छता के लिए सरकार लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रही है वहीं दूसरी तरफ ग्राम पंचायतों में गोवर व गंदगी के लगे अंबार

✍️ब्यूरो राजू जोशी महाराज छतरपुर मध्य प्रदेश

कागजों में सचिव सरपंचों द्वारा करवा दी जाती है साफ-सफाई और सिर्फ साफ सफाई के नाम पर सिर्फ फॉर्मेलिटी की जाती है

मामला जनपद पंचायत बिजावर से है जहां पर दर्जनों पंचायत ऐसी है जहां पर गोबर इत्यादि गंदगी के अंबार लगे हुए हैं मजे की बात यह है कि सचिव और सरपंचों द्वारा पिछले पिछले दिनों साफ-सफाई भी करवाई कई या कहें सिर्फ फॉर्मेलिटी करवाई गई ग्राम पंचायत शाहगढ़ ग्राम पंचायत डिलारी ग्राम पंचायत धर्मपुरा ग्राम पंचायत भारतपुरा ग्राम पंचायत रंगोली के ग्राम पंचायत गुलाट और ऐसी दर्जनों ग्राम पंचायतें और ग्राम पंचायत के ग्राम शामिल है जहां पर घरों के पास में ही गोवर के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं ब सड़कों के बगल में बनी नालियों से पानी बह रहा है जिससे ग्राम वासियों को कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बना हुआ है लेकिन कहने को तो लोकतंत्र है और जनता मालिक है लेकिन सरपंच और सचिवों की मनमानी के चलते लगता है सिर्फ जो कुछ है सरपंच और सचिव ही है इसका एक बड़ा कारण और भी है कुछ ग्राम पंचायत हैं काफी इंटीरियल में है जिससे जनपद पंचायत बिजावर के सीईओ हो या पंचायत स्पेक्टर औशियार सब अपने अपने कार्यालय में ही बैठकर ग्राम पंचायतों के विकास कार्य कागजों में ही कर लेते हैं मजे की बात तो यह है कि वर्ष 2122 में बगैर काम कराए ग्राम पंचायत शाहगढ़ से सचिव व सरपंच द्वारा 46 लाख 96 हजार रुपए की राशि निकाली गई वही ग्राम पंचायत धर्मपुरा में भी कई घोटाले सामने आए हैं विभाग की तरफ से भी कार्रवाई की गई लेकिन सचिव और सरपंचों की पकड़ इतनी तेज है कि सिर्फ कार्रवाई के नाम पर फॉर्मेलिटी की गई जिसका खामियाजा सिर्फ और सिर्फ ग्रामवासी ही भुगत रहे हैं कुछ ग्राम वासियों ने सवाल भी किए कि हमारे पूर्वज जंगलों में रहते थे तो क्या उनका गुनाह था गरीब और अशिक्षित होना हमारे लिए गुनाह हो गया है लेकिन हम चाहते हैं हमारे बच्चे पढ़े-लिखे लेकिन प्रशासन के लोग मानो कसम खाए हुए हैं स्कूलों की भी खस्ता हालत है शिक्षा का स्तर दिन बा दिन गिरता जा रहा है बच्चे छठी कक्षा में पहुंच गए हैं लेकिन वह किताब नहीं पढ़ सकते ऐसी अनेकों मूलभूत सुविधाओं से वंचित है ग्रामवासी पंचायतों की होती है महत्वपूर्ण भूमिका लेकिन सरपंच और सचिव प्रतिक्रिया के उलट कर रहे कार्य पंचायत के चुनाव को तकरीबन 8 महीने होने जा रहे हैं लेकिन सचिव और सरपंचों ने आज तक दर्जनों पंचायतों में कोई ग्रामसभा नहीं की कुछ उपसरपंच और पंचों ने भी आरोप लगाए हैं की गांव के विकास कार्य के लिए एक प्रक्रिया होती है ग्राम सभा जिसमें पंच सरपंच वा ग्रामवासी शामिल होते हैं और गांव के विकास के लिए सभी अपनी राय भी रखते हैं लेकिन लेकिन चुनाव के 8 महीना बीत जाने के बाद भी आज दिनांक तक कोई ग्रामसभा आयोजित नहीं की गई जिससे ग्रामीणों का शासन प्रशासन पर से भरोसा उठता जा रहा है

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